सोने में निवेश पर टैक्स: फिजिकल गोल्ड, ETF, SGB और डिजिटल गोल्ड पर कितना और कैसे लगता है?
सारांश
Key Takeaways
भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता रहा है। लेकिन अब निवेशकों के पास फिजिकल गोल्ड के अलावा गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और डिजिटल गोल्ड जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। इन सभी विकल्पों पर लागू होने वाले टैक्स के नियम अलग-अलग हैं, जिन्हें समझना हर निवेशक के लिए ज़रूरी है।
फिजिकल गोल्ड पर टैक्स के नियम
आयकर नियमों के अनुसार, फिजिकल गोल्ड — यानी गहने, सिक्के या बिस्किट — को कैपिटल एसेट माना जाता है। यदि इसे खरीद के 2 साल के भीतर बेचा जाए, तो प्राप्त मुनाफे पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) लागू होता है और यह निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है।
वहीं, 2 साल से अधिक समय तक रखने पर यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की श्रेणी में आता है और इस पर 12.5 प्रतिशत का फ्लैट टैक्स देना होता है। उल्लेखनीय है कि अब इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता। इसके अतिरिक्त, ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज को टैक्स गणना में अलग से नहीं घटाया जा सकता।
गोल्ड ईटीएफ पर टैक्स की स्थिति
गोल्ड ईटीएफ एक ऐसा निवेश माध्यम है जिसमें बिना फिजिकल सोना खरीदे, सोने की कीमत में निवेश किया जा सकता है। इसके लिए डिमैट अकाउंट अनिवार्य है।
टैक्स के नज़रिए से, यदि गोल्ड ईटीएफ को 1 साल के भीतर बेचा जाए तो STCG लागू होता है और यह निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है। 1 साल से अधिक समय तक रखने पर LTCG माना जाता है और 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होता है।
डिजिटल गोल्ड पर टैक्स और जोखिम
डिजिटल गोल्ड आजकल काफी लोकप्रिय हो रहा है, जहाँ निवेशक मोबाइल ऐप्स के माध्यम से छोटी-छोटी मात्रा में सोना खरीद सकते हैं और संबंधित कंपनियाँ उनकी ओर से सोना सुरक्षित रखती हैं।
टैक्स के मामले में, डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड की तरह ही माना जाता है — 2 साल से कम होल्डिंग पर STCG और 2 साल से अधिक रखने पर 12.5 प्रतिशत LTCG लागू होता है। हालाँकि, यह निवेश अभी पूरी तरह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) या सेबी (SEBI) द्वारा विनियमित नहीं है, इसलिए इसमें अतिरिक्त जोखिम भी बना रहता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: सबसे अलग और फायदेमंद
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और सोने में निवेश का सबसे विशिष्ट तरीका माना जाता है। इसमें निवेशक को 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी प्राप्त होता है।
जानकारों के अनुसार, SGB की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि इसे पूरी परिपक्वता अवधि, यानी 8 साल तक रखा जाए, तो उस पर मिलने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। परंतु यदि बीच में बेचा जाए, तो 12.5 प्रतिशत LTCG या इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार STCG लागू हो सकता है।
किस विकल्प में कितना टैक्स — एक नज़र में
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर हैं और निवेशकों की रुचि इस परिसंपत्ति वर्ग में लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि सही विकल्प का चुनाव न केवल रिटर्न बल्कि टैक्स देनदारी को भी सीधे प्रभावित करता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना हमेशा उचित रहता है।