'गांजा' बयान मामले में अफजाल अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं, 15 दिन में ट्रायल कोर्ट जाने का निर्देश
सारांश
Key Takeaways
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार, 2 मई 2026 को गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी को 'गांजा' संबंधी विवादित बयान के मामले में सीधी राहत देने से इनकार कर दिया। हालाँकि, अदालत ने उन्हें 15 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लिकेशन और गिरफ्तारी पर रोक के लिए अर्जी दाखिल करने की छूट प्रदान की है।
हाईकोर्ट का आदेश क्या है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याची अफजाल अंसारी ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लिकेशन दाखिल कर सकते हैं और साथ ही गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए भी वहाँ उचित अर्जी दे सकते हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट उनके आवेदन पर नियमानुसार विचार करते हुए निर्णय ले।
महत्वपूर्ण रूप से, हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि 15 दिनों की इस अवधि के दौरान अंसारी के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का पर्याप्त समय मिल सके।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सितंबर 2024 में गाजीपुर कोतवाली में अफजाल अंसारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर 'गांजा' से जुड़े एक बयान के माध्यम से धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया था। जाँच पूरी होने के पश्चात पुलिस ने ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और समन आदेश भी जारी किया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब अंसारी परिवार पहले से ही कई कानूनी मामलों में उलझा हुआ है। उनके दिवंगत भाई मुख्तार अंसारी के विरुद्ध दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज थे और परिवार पर राजनीतिक-आपराधिक नेक्सस के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।
हाईकोर्ट क्यों नहीं दी सीधी राहत
अफजाल अंसारी ने ट्रायल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट और समन आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से परहेज करते हुए उन्हें पहले निचली अदालत में उचित कानूनी उपाय आज़माने का निर्देश दिया। यह न्यायिक प्रक्रिया के सामान्य क्रम के अनुरूप है, जिसमें उच्च न्यायालय तभी हस्तक्षेप करते हैं जब निचली अदालत में उपलब्ध विकल्प समाप्त हो जाएँ।
आगे की कानूनी राह
अब अफजाल अंसारी को 15 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लिकेशन दाखिल करनी होगी। यदि ट्रायल कोर्ट उनकी अर्जी खारिज करती है, तो वे पुनः हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं। इस प्रकार हाईकोर्ट ने उनके लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुला रखा है, भले ही अभी सीधी राहत नहीं मिली।