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यूपी जनगणना 2027: घर-घर पहुंचेगी टीम, 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक नए गांव-तहसील गठन पर रोक

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यूपी जनगणना 2027: घर-घर पहुंचेगी टीम, 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक नए गांव-तहसील गठन पर रोक

सारांश

डेढ़ दशक के इंतज़ार के बाद भारत की 8वीं जनगणना का काउंटडाउन शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश में 5 लाख कार्मिक घर-घर दस्तक देंगे, जातिगत आंकड़े भी जुटेंगे और 31 दिसंबर 2025 से नए गांव-तहसील के गठन पर रोक लग चुकी है — यह सिर्फ गिनती नहीं, अगले दशक की नीतियों की नींव है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की निर्णायक तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित; यह देश की 8वीं जनगणना होगी।
31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक सभी राजस्व एवं प्रशासनिक इकाइयाँ 'फ्रीज' — कोई नया गांव या तहसील नहीं बनेगी।
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग) 22 मई से 20 जून ; दूसरा चरण (व्यक्तिगत गणना) 9–28 फरवरी 2027 ।
प्रदेश में 3.9 लाख गणना ब्लॉक और लगभग 5 लाख कार्मिक तैनात; प्रशिक्षण 10 मई तक पूरा।
जनगणना में कुल 34 प्रश्न ; आय से संबंधित कोई सवाल नहीं, जातिगत आंकड़े अलग प्रक्रिया से संकलित होंगे।
पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप आधारित; स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध।

उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक शीतल वर्मा ने 2 मई 2026 को लखनऊ में बताया कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक सभी राजस्व एवं प्रशासनिक इकाइयों को 'फ्रीज' किया जाएगा — इस अवधि में न कोई नया राजस्व गांव बनेगा, न नई तहसील का गठन होगा। यह देश की 8वीं जनगणना होगी, जिसकी निर्णायक तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है।

जनगणना के दो चरण

जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण 'हाउस लिस्टिंग' का होगा, जो उत्तर प्रदेश में 22 मई से 20 जून तक चलेगा। इसमें घरों, भवनों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत गणना की जाएगी। इसी चरण में परिवार के सदस्यों की संख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जातिगत आंकड़े भी संकलित किए जाएंगे, जिसके लिए अलग मानक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

प्रशासनिक ढांचा और कार्मिक तैनाती

पूरे प्रदेश को करीब 3.9 लाख गणना ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। इस कार्य के लिए लगभग 5 लाख कार्मिकों की तैनाती होगी और उनका प्रशिक्षण 10 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। मंडल स्तर पर आयुक्त, जिला स्तर पर जिलाधिकारी तथा पंचायती राज और शिक्षा विभाग को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। अधिकांश प्रगणक शिक्षक होंगे, जिन्हें मानदेय दिया जाएगा।

घर-घर सर्वे: तकनीक और प्रक्रिया

जनगणना के दौरान प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। एक घर की गणना में औसतन 10 मिनट का समय लगेगा और एक प्रगणक प्रतिदिन 5 से 6 घरों का सर्वे करेगा। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित होगी, जो ऑफलाइन भी कार्य करेगा और नेटवर्क उपलब्ध होने पर डेटा सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। परिवार की परिभाषा 'कॉमन किचन' के आधार पर तय की गई है — यानी जो लोग एक ही रसोई से भोजन करते हैं, उन्हें एक परिवार माना जाएगा।

क्या पूछा जाएगा, क्या नहीं

निदेशक शीतल वर्मा के अनुसार जनगणना में कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें आय से संबंधित कोई सवाल शामिल नहीं होगा — केवल रोजगार और कार्य से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। नागरिकों के लिए स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिसका बाद में सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना का नागरिकता से कोई संबंध नहीं है और दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी।

वंचित वर्गों की भागीदारी और महत्व

बेघर, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले और अन्य वंचित वर्गों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। निदेशक ने कहा कि जनगणना देश की विकास योजनाओं की आधारशिला है और इससे विभिन्न क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन संभव होता है। गौरतलब है कि भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी, और यह नई जनगणना डेढ़ दशक बाद नीति-निर्माण के लिए ताज़ा आधार तैयार करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी भी लोकतंत्र के लिए असामान्य रूप से लंबा अंतराल है। इस बार जातिगत आंकड़ों का समावेश राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और आरक्षण नीतियों पर बहस को नई धार दे सकता है — लेकिन स्रोत में इसके लिए 'अलग मानक प्रक्रिया' का उल्लेख है, जिसका विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ। 5 लाख कार्मिकों की तैनाती और मोबाइल ऐप आधारित डेटा संग्रह महत्वाकांक्षी है, पर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता ही इस पूरी कवायद की विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में जनगणना 2027 कब से शुरू होगी?
उत्तर प्रदेश में जनगणना का पहला चरण (हाउस लिस्टिंग) 22 मई से 20 जून तक चलेगा। दूसरा चरण, जिसमें व्यक्तिगत गणना होगी, 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा।
जनगणना 2027 में नए गांव और तहसील के गठन पर रोक क्यों लगाई गई है?
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक शीतल वर्मा के अनुसार, प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक सभी राजस्व एवं प्रशासनिक इकाइयों को 'फ्रीज' किया जाएगा। इस दौरान न कोई नया राजस्व गांव बनेगा और न ही नई तहसील का गठन होगा, ताकि गणना इकाइयाँ स्थिर रहें।
जनगणना 2027 में जातिगत आंकड़े भी शामिल होंगे?
हाँ, दूसरे चरण (9–28 फरवरी 2027) में जातिगत आंकड़े भी संकलित किए जाएंगे, जिसके लिए अलग मानक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह राजनीतिक और नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वतंत्र भारत में अब तक जाति-आधारित व्यापक जनगणना नहीं हुई है।
जनगणना में कितने प्रश्न पूछे जाएंगे और क्या आय की जानकारी भी माँगी जाएगी?
जनगणना में कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। निदेशक शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया कि आय से संबंधित कोई सवाल शामिल नहीं होगा — केवल रोजगार और कार्य से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
क्या जनगणना में दी गई जानकारी नागरिकता को प्रभावित करेगी?
नहीं। जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ने स्पष्ट किया है कि जनगणना का नागरिकता से कोई संबंध नहीं है। इसमें दी गई सभी जानकारियाँ पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं और बेघर व झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले वंचित वर्गों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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