उत्तराखण्ड में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का सफल परीक्षण, सीएम धामी ने अमित शाह व सिंधिया का जताया आभार
सारांश
Key Takeaways
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने 2 मई 2026 को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) द्वारा सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में सफल परीक्षण अलर्ट जारी किया गया। यह अलर्ट संदेश सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर प्रसारित किया गया, जो आपदा-संवेदनशील राज्यों में त्वरित चेतावनी प्रसारण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
परीक्षण की पृष्ठभूमि और उत्तराखण्ड की भूमिका
उत्तराखण्ड ने इस आधुनिक तकनीक को शीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के समक्ष लगातार प्रभावी पैरवी की थी। मुख्यमंत्री के विशेष अनुरोध पर इस प्रणाली का प्रथम परीक्षण भी उत्तराखण्ड में ही किया गया था। उस परीक्षण के आधार पर राज्य ने महत्वपूर्ण तकनीकी एवं व्यावहारिक फीडबैक NDMA तथा C-DOT को उपलब्ध कराया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रणाली को परिष्कृत करने में सहायता की।
तकनीक कैसे काम करती है
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय सभी मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक के माध्यम से स्वतः अलर्ट प्राप्त होगा। यह प्रणाली स्थान-विशिष्ट चेतावनी प्रसारण को सक्षम बनाती है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों को ही संदेश प्राप्त होता है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के विशेषज्ञों ने NDMA व C-DOT के दिशा-निर्देशन में प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और अब प्रदेश में इस तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और आभार
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और NDMA के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। धामी ने कहा कि यह तकनीक उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए अत्यंत उपयोगी एवं वरदान सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर यह प्रयास किया गया कि मानसून प्रारंभ होने से पूर्व यह तकनीक राज्य को उपलब्ध हो, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति जनमानस को समय रहते सचेत किया जा सके।
चारधाम यात्रा और मानसून में उपयोग
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि चारधाम यात्रा एवं आगामी मानसून सीजन के दौरान इस प्रणाली का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इससे यात्रियों एवं स्थानीय निवासियों को समय रहते सटीक एवं प्रभावी चेतावनी उपलब्ध कराई जा सकेगी। गौरतलब है कि उत्तराखण्ड प्रतिवर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी आपदाओं से प्रभावित होता है, जिनमें बड़ी संख्या में जनहानि होती है।
आपदा प्रबंधन में बड़ा बदलाव
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस पहल को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग से राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुँचाना अब संभव हो सकेगा, जिससे जनहानि में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी। यह प्रणाली अब उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन ढाँचे का एक अभिन्न हिस्सा बन गई है और भविष्य में इसके विस्तार की संभावनाएँ भी प्रबल हैं।