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भारत से जुड़े एलपीजी टैंकर 'सर्व शक्ति' ने हॉर्मुज स्ट्रेट किया पार, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अहम कदम

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भारत से जुड़े एलपीजी टैंकर 'सर्व शक्ति' ने हॉर्मुज स्ट्रेट किया पार, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अहम कदम

सारांश

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही लगभग ठप थी — लेकिन भारत से जुड़े एलपीजी टैंकर सर्व शक्ति ने 45,000 टन ईंधन लेकर यह संकरा रास्ता पार कर लिया। दुनिया के 20% कच्चे तेल का रास्ता कहलाने वाले इस जलमार्ग पर यह यात्रा भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए राहत की खबर है।

मुख्य बातें

सर्व शक्ति ( मार्शल द्वीप समूह ध्वज) ने 3 मई 2026 को हॉर्मुज स्ट्रेट सफलतापूर्वक पार किया।
पोत पर लगभग 45,000 टन एलपीजी लदी थी और यह भारत की ओर जा रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट से विश्व के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात होता है।
28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर टैंकरों का आवागमन लगभग शून्य हो गया था।
एलएनजी टैंकर मुबाराज ने भी पिछले महीने यह मार्ग पार किया था, जिसे नाकाबंदी में आंशिक ढील का संकेत माना जा रहा है।

भारत से जुड़े लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकर सर्व शक्ति ने 3 मई 2026 को फारस की खाड़ी के संकरे समुद्री मार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार किया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रणनीतिक जलमार्ग से आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह पोत ईरान से जुड़े जहाजों को निशाना बनाकर शुरू की गई अमेरिकी नाकाबंदी के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले भारत से संबद्ध टैंकरों में से एक है।

यात्रा का विवरण

मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला यह विशाल गैस वाहक पोत सर्व शक्ति लगभग 45,000 टन एलपीजी लेकर चल रहा था, जो आमतौर पर खाना पकाने के ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है। शनिवार को यह पोत ईरान के लारक और केशम द्वीपों के निकट से गुजरने के बाद ओमान की खाड़ी में प्रवेश करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि यह जहाज भारत की ओर जा रहा है और यह पहले भी फारस की खाड़ी तथा भारतीय बंदरगाहों के बीच मार्गों पर संचालित होता रहा है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल और पारदर्शिता

ईरान से जुड़े संघर्ष के शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में चलने वाले पोतों द्वारा व्यापक रूप से अपनाए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, सर्व शक्ति वर्तमान में अपने भारतीय गंतव्य और चालक दल के विवरण का प्रसारण कर रहा है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संभावित खतरों से बचने के लिए उठाया जा रहा है। गौरतलब है कि नाकाबंदी के कारण इस जलमार्ग से टैंकरों का आवागमन लगभग शून्य हो गया था।

हॉर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व

हॉर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक माना जाता है, क्योंकि इससे विश्व के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात होता है। 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर भारी व्यवधान आया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

एलएनजी टैंकर मुबाराज की पूर्व यात्रा

पिछले महीने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, एलएनजी टैंकर मुबाराज — जिसने मार्च 2026 की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से माल लोड किया था — भारत के दक्षिणी छोर से गुजरा था। यह पोत कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में निष्क्रिय रहा और लगभग 31 मार्च से सिग्नल भेजना बंद कर दिया था, जिसके बाद सोमवार को यह भारत के पश्चिम में फिर से दिखाई दिया। इस घटनाक्रम को नाकाबंदी में आंशिक ढील के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

आगे की स्थिति

सर्व शक्ति उन सबसे बड़े जहाजों में से एक है जिन्होंने पिछले महीने स्ट्रेट के संक्षिप्त और अव्यवस्थित रूप से फिर से खुलने के बाद से इस मार्ग से यात्रा की है, जिसके तुरंत बाद नए प्रतिबंध लगा दिए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत है, हालाँकि क्षेत्र में स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक जहाज की कामयाबी है — नीति की जीत नहीं। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट पर भारी निर्भरता रखता है, और 28 फरवरी के बाद से इस निर्भरता की कमज़ोरी उजागर हो चुकी है। असली सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इस संकट को वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने के अवसर के रूप में देखती है। एक-दो टैंकरों की आवाजाही से ऊर्जा सुरक्षा नहीं मिलती — उसके लिए दीर्घकालिक रणनीतिक विविधीकरण ज़रूरी है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्व शक्ति टैंकर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सर्व शक्ति एक विशाल गैस वाहक पोत है जो मार्शल द्वीप समूह के ध्वज तले संचालित होता है और भारत से जुड़ा है। यह अमेरिका-ईरान नाकाबंदी के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले भारत से संबद्ध प्रमुख टैंकरों में से एक है, जो 45,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर जा रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
हॉर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। इससे दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात होता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम गलियारा माना जाता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से हॉर्मुज स्ट्रेट पर क्या असर पड़ा?
28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने और ईरान से जुड़े जहाजों को निशाना बनाकर अमेरिकी नाकाबंदी लागू होने के बाद इस जलमार्ग से टैंकरों का आवागमन लगभग शून्य हो गया था। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बाधित हो गया था।
एलएनजी टैंकर मुबाराज की यात्रा का क्या महत्व है?
मुबाराज ने मार्च 2026 की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से माल लोड किया था और हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत के दक्षिणी छोर से गुजरा। यह 28 फरवरी के संघर्ष के बाद से एलएनजी की पहली खेप थी, जिसे नाकाबंदी में आंशिक ढील का संकेत माना जा रहा है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ा है?
हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी से भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, क्योंकि भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलपीजी आयात करता है। सर्व शक्ति जैसे टैंकरों की सफल यात्रा आपूर्ति बहाल करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है, हालाँकि क्षेत्र में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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