इस्लामाबाद में अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा गिरफ्तार, पाकिस्तान में शरणार्थियों पर अत्याचार के आँकड़े चौंकाने वाले
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तानी पुलिस ने 21 मई 2025 को इस्लामाबाद के फैसल टाउन इलाके से अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को गिरफ्तार कर लिया। खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरफ्तारी बुधवार शाम 6:45 बजे हुई। अधिकारियों ने अब तक गिरफ्तारी का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
यह गिरफ्तारी उस व्यापक अभियान के बीच हुई है जो पाकिस्तान ने बिना दस्तावेज़ वाले विदेशी नागरिकों के विरुद्ध छेड़ रखा है। पिछले कुछ महीनों में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी और निर्वासन की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं, जिनमें पत्रकार और मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस अभियान की कार्यशैली पर गंभीर चिंता जताई है।
एएमएसओ की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आँकड़े
8 मई को अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एएमएसओ) ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसे वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के साथ मिलकर तैयार किया गया और संयुक्त राष्ट्र की कमेटी अगेंस्ट टॉर्चर के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट 41 अफगान नागरिकों पर किए गए सर्वे, 6 विस्तृत साक्षात्कारों और यूएनएचसीआर, आईओएम, एमनेस्टी इंटरनेशनल तथा ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान के दस्तावेज़ों पर आधारित है। इसके प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
सर्वे में शामिल 68.3% अफगानों ने बताया कि उन्हें गिरफ्तार किया गया या जेल में रखा गया। हिरासत में लिए गए 96.4% लोगों ने दुर्व्यवहार की पुष्टि की। 85.7% को गिरफ्तारी से बचने या रिहाई के लिए पैसे देने पड़े, और 72.4% को बिना किसी कानूनी सुनवाई के 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया।
निर्वासन का पैमाना
एएमएसओ के अनुसार, 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से मिलाकर 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है। संगठन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान से निकाले गए किसी भी व्यक्ति का पहले व्यक्तिगत जोखिम आकलन नहीं किया गया — जो अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून की एक बुनियादी आवश्यकता है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
75.6% अफगानों ने बताया कि उन्हें धमकियाँ दी गईं, अपमानित किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। एएमएसओ ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों, बदसलूकी, जबरन धन वसूली और जबरन निर्वासन की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या
परवेज अमीनजादा की गिरफ्तारी के बाद अफगान मीडिया और मानवाधिकार समूह उनकी रिहाई की माँग कर रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला उस बड़े संकट का हिस्सा है जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर पाकिस्तान की जवाबदेही को लेकर बहस को और तेज़ कर सकता है।