क्या इस्लामाबाद पुलिस ने अफगान पत्रकार को हिरासत में लिया?

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क्या इस्लामाबाद पुलिस ने अफगान पत्रकार को हिरासत में लिया?

सारांश

पाकिस्तान में अफगान पत्रकार उबैदुल्लाह अहमदी की गिरफ्तारी ने मीडिया और मानवाधिकार संगठनों में चिंता बढ़ा दी है। क्या पाकिस्तान पत्रकारों की सुरक्षा को गंभीरता से लेगा?

Key Takeaways

  • उबैदुल्लाह अहमदी की गिरफ्तारी ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
  • पाकिस्तान में अफगान पत्रकारों की गिरफ्तारी की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
  • मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान से जिम्मेदारियों को निभाने का आग्रह किया है।
  • अफगान मीडिया आउटलेट्स ने रिपोर्ट पेश की हैं जो सुरक्षा उल्लंघनों को दर्शाती हैं।

काबुल, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पुलिस ने अफगान पत्रकार (फ्रीलांस) उबैदुल्लाह अहमदी को हिरासत में लिया है, जिससे निर्वासित पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

अहमदी की गिरफ्तारी का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, और पाकिस्तानी पुलिस ने अभी तक हिरासत के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरफ्तारी अवैध अफगान प्रवासियों की पहचान और जबरन निर्वासन के लिए घर-घर जांच के तेज अभियान के दौरान हुई है।

स्थिति पर नजर रखने वाले मीडिया कर्मियों और एडवोकेसी ग्रुप्स के अनुसार, इन अभियानों के दौरान दर्जनों अफगान पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से अधिकांश के पास सुरक्षा हासिल करने का जरूरी कानूनी अधिकार भी नहीं है।

हिरासत में लिए गए कई पत्रकारों ने कहा है कि जबरन अफगानिस्तान वापसी से उनकी जान को खतरा हो सकता है। पत्रकारों की गिरफ्तारी ने मानवाधिकार संगठनों और मीडिया संगठनों के बीच चिंता को बढ़ा दिया है। इन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें।

अफगान मीडिया आउटलेट अमू टीवी ने पिछले साल दिसंबर में एक रिपोर्ट पेश की थी। मीडिया वॉचडॉग रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की तैयार रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान ने 2025 में 20 अफगान पत्रकारों को जबरदस्ती स्वदेश भेज दिया था, जो शरणार्थियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का उल्लंघन था।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स और अपने डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए, आरएसएफ ने कहा कि अफगान पत्रकारों को पाकिस्तान से निकालना नॉन-रिफाउलमेंट (वापस न भेजने) के अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांत का "साफ उल्लंघन" था। और कहा कि पाकिस्तान में रह रहे अन्य अफगान पत्रकारों को गिरफ्तारी, जबरदस्ती वसूली और तुरंत देश निकाला का डर सता रहा है।

आरएसएफ ने बताया कि 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान की सत्ता काबिज होने के बाद तालिबान की धमकियों या प्रतिशोध के खौफ से 200 अफगान पत्रकार पाकिस्तान भाग गए थे। इनमें से कई पत्रकार आरएसएफ की मदद से पश्चिमी देशों में जाने की प्रक्रिया में हैं; हालांकि, वर्षों से बसने की प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे आवेदक कानूनी उलझन में फंसे हुए हैं।

अमू टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएफ ने कहा कि पाकिस्तान ने 2025 के मध्य से अफगानों के लिए निवास परमिट शायद ही कभी बढ़ाया है, जिससे पत्रकारों समेत हजारों लोगों पर "अवैध" घोषित किए जाने का खतरा मंडरा रहा है। इसने आगे कहा कि पिछले छह महीनों में अफगान पत्रकारों की मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत और निर्वासन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

Point of View

यह कहना आवश्यक है कि पत्रकारों की सुरक्षा एक लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद है। पाकिस्तान को चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारियों को समझे और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

उबैदुल्लाह अहमदी को क्यों हिरासत में लिया गया?
हिरासत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या पाकिस्तान में अफगान पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं?
हाँ, कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।
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