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खैबर पख्तूनख्वा: शांगला में दो कोयला खदान हादसों में दो मजदूरों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

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खैबर पख्तूनख्वा: शांगला में दो कोयला खदान हादसों में दो मजदूरों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

सारांश

पाकिस्तान के शांगला जिले में एक ही दिन दो अलग-अलग कोयला खदानों में हुई दुर्घटनाओं ने दो मजदूरों की जान ले ली। पिछले महीने बलूचिस्तान में भी पाँच खनिकों की मौत हुई थी — यह सिलसिला बताता है कि पाकिस्तान में खदान सुरक्षा महज़ कागज़ों पर है।

मुख्य बातें

शांगला जिले की दो अलग-अलग कोयला खदानों में 21 मई को दो मजदूरों की मौत हो गई, एक अन्य घायल।
अकोरवाल खदान की माइन नंबर 5 में मलबा गिरने से दो मजदूर दबे; ढाई घंटे के रेस्क्यू के बाद एक की मौत की पुष्टि।
चपरमश्ती क्षेत्र की खदान में एक अन्य मजदूर की काम के दौरान मौत; शव परिजनों को सौंपा गया।
पिछले महीने बलूचिस्तान के बोलान और दुकी में भी पाँच खनिकों की मौत ; बोलान में मीथेन गैस के जमाव से दम घुटने की पुष्टि।
श्रमिक संगठनों ने सरकार से खदानों में सख्त सुरक्षा नियम तत्काल लागू करने की माँग की।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में 21 मई को दो अलग-अलग कोयला खदान दुर्घटनाओं में दो खनिकों की मौत हो गई और एक अन्य मजदूर घायल हो गया। इन हादसों ने पाकिस्तान की खदानों में व्याप्त सुरक्षा खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

पहला हादसा अकोरवाल कोयला खदान की माइन नंबर 5 में हुआ, जहाँ काम के दौरान मलबा गिरने से दो मजदूर दब गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग ढाई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक एक की मौत हो चुकी थी और दूसरा घायल हो गया था। मृतक और घायल दोनों शांगला जिले के निवासी बताए गए हैं।

दूसरी दुर्घटना चपरमश्ती क्षेत्र की एक कोयला खदान में हुई, जहाँ काम के दौरान एक अन्य मजदूर की जान चली गई। उसका शव उसके गाँव ले जाया गया, जहाँ परिजनों ने उसे सुपुर्द-ए-खाक किया।

पाकिस्तान में खदान हादसों का पैटर्न

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने ही बलूचिस्तान प्रांत के बोलान और दुकी क्षेत्रों में खदान हादसों में पाँच मजदूरों की मौत हो गई थी और एक घायल हुआ था। जाँच में पता चला था कि बोलान खदान में मीथेन गैस का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया था, जिससे तीन श्रमिकों का दम घुट गया। कुछ श्रमिकों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर अधिकारियों को सूचित किया था।

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में खदान हादसों के पीछे अक्सर मीथेन गैस का जमाव, ऑक्सीजन की कमी और खनन ट्रॉली से टकराने जैसी दुर्घटनाएँ ज़िम्मेदार होती हैं। गौरतलब है कि ये हादसे किसी अपवाद नहीं, बल्कि एक बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा हैं।

सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने पाकिस्तान की खदानों में सुरक्षा उपायों की गंभीर कमी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं और खनिकों की जिंदगी पर लगातार खतरा बना रहता है। संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सभी खदानों में सख्त सुरक्षा नियम लागू करने की माँग की है।

आम जनता और श्रमिकों पर असर

खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे प्रांतों में कोयला खनन हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत है। लगातार हो रहे इन हादसों के बीच खनिक अत्यंत असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकारी निगरानी तंत्र की विफलता के चलते श्रमिकों की जानें जोखिम में पड़ती रहती हैं।

क्या होगा आगे

श्रमिक संगठनों की माँग है कि सरकार खदान सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करे और नियमित निरीक्षण अनिवार्य करे। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों का सिलसिला थमने वाला नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में संरचनागत विफलता की तस्वीर है। मीथेन गैस की निगरानी, मलबा-रोधी सुरंग निर्माण और आपातकालीन रेस्क्यू — ये बुनियादी मानक हैं जिन्हें लागू न करना सरकारी उदासीनता को दर्शाता है। जब तक खदान निरीक्षण स्वतंत्र, नियमित और दंडनीय न हो, ये घोषणाएँ और माँगें महज़ रस्म अदायगी बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांगला कोयला खदान हादसा क्या हुआ?
21 मई को खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले में दो अलग-अलग कोयला खदानों में दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें दो मजदूरों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। अकोरवाल खदान की माइन नंबर 5 में मलबा गिरने और चपरमश्ती क्षेत्र की खदान में एक अलग हादसे में ये जानें गईं।
पाकिस्तान में खदान हादसों का मुख्य कारण क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में खदान हादसों के पीछे मुख्यतः मीथेन गैस का खतरनाक जमाव, ऑक्सीजन की कमी और मलबा गिरना ज़िम्मेदार है। बलूचिस्तान के बोलान हादसे में जाँच से पुष्टि हुई थी कि मीथेन गैस से तीन श्रमिकों का दम घुट गया था।
पिछले महीने बलूचिस्तान में क्या हुआ था?
पिछले महीने बलूचिस्तान प्रांत के बोलान और दुकी क्षेत्रों में खदान हादसों में पाँच मजदूरों की मौत हो गई थी और एक घायल हुआ था। जाँच में सामने आया कि बोलान खदान में मीथेन गैस का स्तर बढ़ने से तीन श्रमिकों की दम घुटने से मौत हुई।
श्रमिक संगठनों ने क्या माँग की है?
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से खदानों में तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने और सख्त नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की माँग की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले ये हादसे सरकारी निगरानी की विफलता को उजागर करते हैं।
खैबर पख्तूनख्वा में खनिकों की सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
आलोचकों और श्रमिक संगठनों के अनुसार खैबर पख्तूनख्वा सहित पाकिस्तान के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत कमज़ोर है। मीथेन गैस निगरानी उपकरणों की कमी, अपर्याप्त रेस्क्यू तंत्र और ढीली सरकारी निगरानी के चलते खनिक जानलेवा जोखिम में काम करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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