क्या पाकिस्तान में इस्लामाबाद में अफगान शरणार्थियों की धरपकड़ तेज हो गई है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तानी पुलिस ने अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी तेज कर दी है।
- निवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो गई है।
- मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा की अपील की है।
- गिरफ्तारी में पत्रकारों को भी शामिल किया गया है।
- अस्थायी शिविरों में भेजे जाने का खतरा है।
काबुल, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की पुलिस ने इस्लामाबाद में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी में तेजी लाते हुए कई लोगों को, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है, अस्थायी शिविरों में स्थानांतरित किया है। स्थानीय मीडिया ने इस संबंध में जानकारी दी।
अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस के अनुसार, इस्लामाबाद में पाकिस्तानी पुलिस शरण मांगने वाले अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तार कर जबरन देश से बाहर भेज रही है, जिससे पहले से ही विस्थापित समुदायों पर भारी दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पुलिस ने इस्लामाबाद के बी-17 क्षेत्र से कई अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया और उन्हें हाजी कैंप नामक अस्थायी शिविर में भेज दिया। सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पत्रकार भी शामिल है, जिससे पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता और मीडिया कर्मियों के साथ व्यवहार के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं।
इससे पहले, अफगान शरणार्थियों ने पाकिस्तानी पुलिस पर उत्पीड़न और जबरन वसूली के आरोप लगाए हैं। खासकर फैसल टाउन जैसे क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर चौबीसों घंटे अभियान चलाए गए हैं, जिनमें कई बार वे सिविल कपड़ों में भी नजर आए हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शरणार्थियों में डर का माहौल बन गया है। इनमें से कई लोग वर्षों से पाकिस्तान में रह रहे हैं और उनके पास कोई कानूनी सुरक्षा नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान से कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दायित्वों का पालन करने की अपील की है। उनका कहना है कि जबरन निर्वासन अफगान शरणार्थियों को गंभीर खतरों में डाल सकता है।
पिछले सप्ताह प्रमुख मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी सरकार से अपील की थी कि वे अपने देश में रह रहे अफगान शरणार्थियों को उत्पीड़न और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अवैध यातनाओं से बचाने के लिए कदम उठाएं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे एक खुले पत्र में संगठन ने वहां रह रहे अफगान शरणार्थियों की अवैध हिरासत, उत्पीड़न और निर्वासन पर गहरी चिंता जताई और कहा कि वे बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं और राज्य संरक्षण के हकदार हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मांग की है कि पाकिस्तानी अधिकारी अफगान शरणार्थियों के निर्वासन को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाएं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
पत्र में कहा गया, “पाकिस्तानी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगान शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा हो, विशेषकर उन्हें मनमानी हिरासत और शरणार्थी शिविरों या आवासों से जबरन निकाले जाने से बचाया जाए।”
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि लगभग 1.10 लाख शरणार्थी और शरण चाहने वाले सीधे तौर पर निर्वासन के खतरे का सामना कर रहे हैं और उन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। संगठन ने विशेष रूप से महिलाओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की संवेदनशील स्थिति की ओर ध्यान दिलाया, जिन्हें जबरन अफगानिस्तान लौटाए जाने पर गंभीर जोखिम हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान पिछले 40 वर्षों से अफगान शरणार्थियों की मेजबानी कर रहा है और उसने संघर्ष व राजनीतिक अस्थिरता से भागे लाखों अफगानों को शरण दी है। हालांकि, सितंबर 2023 में “अवैध विदेशी प्रत्यावर्तन योजना” शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने बिना दस्तावेजों और अप्रमाणित अफगानों को, यहां तक कि कुछ वैध शरणार्थी दर्जा रखने वालों को भी, देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।