पाकिस्तान की अमेरिका-ईरान युद्धविराम में भूमिका पर पूर्व सैनिकों के तंज

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पाकिस्तान की अमेरिका-ईरान युद्धविराम में भूमिका पर पूर्व सैनिकों के तंज

सारांश

पूर्व सैनिकों ने पाकिस्तान की अमेरिका-ईरान युद्धविराम में मध्यस्थता की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे मजाक में उड़ाते हुए कहा कि इजराइल और पाकिस्तान के खराब संबंधों के चलते यह संभावना संदिग्ध है।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठते हैं।
  • पूर्व सैनिकों ने कहा कि पाकिस्तान ने गलत जानकारी दी।
  • इजराइल और पाकिस्तान के बीच संबंधों का प्रभाव महत्वपूर्ण है।
  • पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर संदेह किया गया है।
  • ट्रंप ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है, पर विवाद बना हुआ है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व सैनिकों ने शुक्रवार को उन ख़बरों का मजाक उड़ाया, जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की। उनका कहना था कि इजराइल और पाकिस्तान के रिश्ते अच्छे नहीं हैं, इसलिए ऐसे जटिल और बहुपक्षीय संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

पूर्व सैनिकों का मानना है कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बताया।

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से बातचीत के आधार पर लिया।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने उनसे अनुरोध किया था कि ईरान पर हो रही विनाशकारी कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया जाए।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया कि तेहरान ने यह समझौता पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के 'भाईचारे वाले अनुरोध' के जवाब में स्वीकार किया। इसके बाद पाकिस्तान की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।

भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन अनिल गौड़ ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान एक ईमानदार मध्यस्थ की तरह काम नहीं कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच सही और पूरा संदेश नहीं पहुँचाया, जिससे गलतफहमी उत्पन्न हुई।

मध्यस्थ का काम बहुत अहम होता है और उसे दोनों पक्षों के बीच सभी शर्तें और बातें स्पष्ट रूप से पहुँचानी चाहिए, ताकि बातचीत सही आधार पर आगे बढ़ सके।

उन्होंने इजराइल और पाकिस्तान के बीच खराब संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट में इजराइल के खिलाफ की गई टिप्पणी से स्थिति और संवेदनशील हो जाती है।

इजराइल के भारत में राजदूत रूवेन अजार ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि तेल अवीव पाकिस्तान को एक 'विश्वसनीय पक्ष' नहीं मानता।

कैप्टन अनिल गौड़ ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान केवल अपने फायदे के लिए काम कर रहा है और खुद को जरूरत से ज्यादा महत्व देने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान केवल अमेरिका के करीब रहने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट के शुरुआती ड्राफ्ट में 'ड्राफ्ट–पाकिस्तान पीएम संदेश' जैसा उल्लेख था, जिससे यह सवाल उठे कि संदेश तैयार किसने किया।

कमोडोर (सेवानिवृत्त) उदय भास्कर ने बातचीत में कहा कि पाकिस्तान को 'पीसमेकर' कहना सही नहीं होगा, बल्कि उसे एक 'सुविधा देने वाला' या 'मध्यस्थ को मदद करने वाला पक्ष' कहा जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान इस वार्ता के मुख्य पक्ष हैं, जबकि इजराइल इसमें शामिल नहीं है और उसने पाकिस्तान की भूमिका पर आपत्ति जताई है।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि पाकिस्तान द्वारा नोबेल पुरस्कार की चर्चा पर 'उसे शुभकामनाएं' हैं। साथ ही यह भी जोड़ा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भी नोबेल की इच्छा रखते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इजराइल की भूमिका को देखते हुए इन वार्ताओं के नतीजों को लेकर ज्यादा आशावादी होना मुश्किल है।

Point of View

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम में क्या भूमिका निभाई?
पाकिस्तान ने युद्धविराम में मध्यस्थता का दावा किया है, लेकिन पूर्व सैनिकों का मानना है कि इसकी भूमिका संदिग्ध है।
पूर्व सैनिकों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या कहा?
पूर्व सैनिकों ने कहा कि पाकिस्तान ने गलत जानकारी दी और अपनी भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
इजराइल और पाकिस्तान के संबंधों का क्या प्रभाव है?
इजराइल और पाकिस्तान के खराब संबंधों के कारण, पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
क्या पाकिस्तान एक ईमानदार मध्यस्थ है?
पूर्व सैनिकों का मानना है कि पाकिस्तान एक ईमानदार मध्यस्थ की तरह काम नहीं कर रहा है।
क्या ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका को स्वीकार किया है?
हां, ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बातचीत के आधार पर निर्णय लेने का दावा किया है।
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