ईरान-अमेरिका तनाव: युद्धविराम टूटने के बाद वैश्विक संकट की आशंका, रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु ने 8 जुलाई को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्य-पूर्व में लागू किया गया युद्धविराम शुरू से ही अत्यंत नाजुक था और उसका टूटना अपरिहार्य था। उनके अनुसार इस टकराव के दूरगामी परिणाम केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को महंगाई, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
युद्धविराम क्यों टूटा
ब्रिगेडियर शारदेंदु के अनुसार, युद्धविराम भंग होने की शुरुआत ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कार्रवाई से हुई। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में लगातार तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमले हुए, जिसने अमेरिका को सैन्य प्रतिक्रिया का आधार उपलब्ध करा दिया। उन्होंने कहा कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी निगरानी और नियंत्रण बनाए रखना चाहता था, जबकि अमेरिका और अन्य देश स्वतंत्र समुद्री आवाजाही के पक्षधर थे — यही टकराव हालात को विस्फोटक बनाने का कारण बना।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का दायरा
रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाते हुए लगभग 80 लक्ष्यों को निशाना बनाया। इनमें कमांड सेंटर, लॉन्चिंग साइट और स्पीड बोट जैसे सैन्य ठिकाने शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम का दौर दोनों सेनाओं के लिए तैयारी का समय था — और जैसे ही अवसर मिला, सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले युद्धविराम और 14 सूत्रीय कार्यक्रम का समर्थन किया था, लेकिन सैन्य अवसर मिलते ही अमेरिका ने बड़े स्तर पर हमले फिर शुरू कर दिए।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
ब्रिगेडियर शारदेंदु ने आशंका जताई कि इस संघर्ष का सबसे गहरा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है और शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है, ऊर्जा संकट गहरा सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हो सकती है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से विश्व के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहाँ कोई भी व्यवधान तेल आयात पर निर्भर देशों — जिनमें भारत भी शामिल है — के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
रणनीतिक समीकरण और इजरायल की भूमिका
रिटायर्ड ब्रिगेडियर के अनुसार, यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में वर्चस्व की लड़ाई है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि ईरान में अभी भी मजबूत सामाजिक एकजुटता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ इजरायल को मिल रहा है, क्योंकि वह ईरान और अमेरिका के बीच किसी स्थायी समझौते का पक्षधर नहीं था। अमेरिका का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है और मौजूदा घटनाक्रम ने उसे इसके लिए सैन्य कार्रवाई का आधार दे दिया है।
आगे क्या होगा
ब्रिगेडियर शारदेंदु ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष कितना लंबा चलेगा, इसका अनुमान लगाना फिलहाल संभव नहीं है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष शांति वार्ता को एक और अवसर देने के लिए तैयार होते हैं या नहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि नई रणनीति बनाकर संवाद बहाल करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएँ, ताकि क्षेत्र को व्यापक युद्ध और उसके वैश्विक दुष्परिणामों से बचाया जा सके।