तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र: उर्दू-अरबी-फारसी शिक्षकों के स्थानांतरण और लंबित वेतन पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 11 अगस्त 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक औपचारिक पत्र लिखकर सरकारी विद्यालयों में उर्दू, अरबी एवं फारसी शिक्षकों के स्थानांतरण में कथित अनियमितताओं और अनुदानित मदरसों तथा संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक-कर्मियों के पाँच-छह महीने से लंबित वेतन का मुद्दा उठाया है। यह पत्र उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया।
स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में कहा कि बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उनके अनुसार, उर्दू, अरबी एवं फारसी विषयों के शिक्षकों के साथ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण और नियम-विरुद्ध व्यवहार किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में व्यापक असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि कई विद्यालयों में इन विषयों के एकमात्र शिक्षक को सरप्लस घोषित कर स्थानांतरण सूची में शामिल कर दिया गया है।
राजद नेता ने तर्क दिया कि यदि किसी विद्यालय में किसी विषय का केवल एक ही शिक्षक उपलब्ध है और उसे स्थानांतरित कर दिया जाए, तो यह उस विद्यालय में उस विषय की पढ़ाई समाप्त करने के समान है। उन्होंने पर्याप्त छात्र संख्या वाले विद्यालयों में भी इन विषयों के स्वीकृत पदों को समाप्त किए जाने पर सवाल उठाया।
नियम-विरुद्ध नामों का सूची में समावेश
तेजस्वी यादव ने शिकायत की कि स्थानांतरण सूची में पाँच वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षकों, संविदा शिक्षकों और हाल ही में स्थानांतरण प्राप्त कर चुके शिक्षकों के नाम भी शामिल किए गए हैं। उनके अनुसार, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
सांस्कृतिक विरासत और समानता का तर्क
राजद नेता ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि संस्कृत की तरह उर्दू भी भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की भाषा है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि दोनों भाषाओं के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार किया जाए तथा प्रत्येक सरकारी विद्यालय में उर्दू और संस्कृत शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएँ।
लंबित वेतन और परिवारों पर असर
तेजस्वी यादव ने अनुदानित मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक-कर्मियों के पाँच-छह महीने से लंबित वेतन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि वेतन न मिलने से इन शिक्षकों के परिवारों की शिक्षा, चिकित्सा, दैनिक खर्च और अन्य बुनियादी ज़रूरतें सीधे प्रभावित हो रही हैं।
सरकार से की गई माँगें
राजद नेता ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की: उर्दू, अरबी एवं फारसी शिक्षकों की सरप्लस व स्थानांतरण सूची की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा; नियम-विरुद्ध पाए जाने वाले स्थानांतरण रद्द करना; एकमात्र विषय शिक्षक को सरप्लस घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक; स्वीकृत पदों को समाप्त न करना; तथा लंबित वेतन का तत्काल भुगतान। उन्होंने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की भी माँग की। यह मामला अब बिहार में शैक्षणिक प्रशासन और भाषाई समानता की बहस को नई धार दे सकता है।