आईआरजीसी का दावा: ईरान ने मार गिराया अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन, होर्मुज तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया, जो कथित तौर पर ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस आया था। यह घटना 26 मई को उस समय हुई जब दोनों देशों के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम लागू था।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार सुबह अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलसंधि के पास कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही नौकाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा बंदर अब्बास बंदरगाह के निकट एक सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया गया। ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार इन हमलों में आईआरजीसी के 4 जवान मारे गए।
इसके जवाब में आईआरजीसी ने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। आईआरजीसी के अनुसार यह ड्रोन ईरानी हवाई सीमा का उल्लंघन कर रहा था।
अमेरिका का पक्ष
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह आत्मरक्षा में की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को सीधे खतरे से बचाने के लिए ये हमले अनिवार्य थे।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम चल रहा था, जिससे यह टकराव कूटनीतिक दृष्टि से और अधिक संवेदनशील हो जाता है।
ईरान की चेतावनी
हमलों के बाद ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेखरची ने कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर फिर हमला हुआ, तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक बड़ा और हिंसक होगा। शेखरची ने यह भी कहा कि अगली बार ईरान की कार्रवाई केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी।
ईरान ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका संघर्ष विराम का उल्लंघन करता है, तो उसे जवाब देने का पूरा अधिकार है।
क्षेत्रीय संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि होर्मुज जलसंधि वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। यह टकराव दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की श्रृंखला में एक और कड़ी है, और अस्थायी युद्धविराम के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।