आईआरजीसी का दावा: 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15, F-16 ठिकानों पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15 और F-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका के बुधवार शाम किए गए हमलों के जवाब में की गई।
हमले का दायरा और निशाने
इस्लामिक रिपब्लिक ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) की रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों ने कथित तौर पर पाँच सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें मुवाफक अल-साल्टी एयर बेस (जॉर्डन), अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन), अहमद अल-जाबेर एयर बेस (कुवैत), अली अल-सालेम एयर बेस (कुवैत), अमेरिकी 5वें बेड़े का मुख्यालय (बहरीन) और शेख ईसा एयर बेस (बहरीन) शामिल बताए गए हैं।
आईआरजीसी के बयान में दावा किया गया कि मिसाइल हमलों में इन सुविधाओं को 'पूरी तरह नष्ट' कर दिया गया और 'बड़ी संख्या में अमेरिकी लड़ाकू विमान भी तबाह हो गए।' गौरतलब है कि ये दावे स्वतंत्र रूप से अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि बुधवार शाम 5:15 बजे (ईस्टर्न टाइम) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान में कई ठिकानों पर 'आत्मरक्षा' में अतिरिक्त हमले किए गए। सेंटकॉम के अनुसार, ये हमले 'ईरान की लगातार और बिना वजह की आक्रामक गतिविधियों' के जवाब में थे।
इससे पहले उसी दिन सेंटकॉम ने यह भी बताया था कि अमेरिकी बलों ने एक तेल टैंकर को रोका, जो कथित तौर पर अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल ले जा रहा था।
परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि में तनाव
राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान परमाणु समझौते पर वॉशिंगटन के साथ सहमत नहीं होता, तो उस पर सैन्य दबाव और बढ़ाया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पहले से ही गतिरोध में है और मध्य-पूर्व में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।
आगे क्या होगा
आईआरजीसी के दावों पर अमेरिकी रक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है, खासतौर पर यदि दोनों पक्ष परमाणु वार्ता की मेज पर नहीं लौटते। जॉर्डन, कुवैत और बहरीन — तीनों देशों की प्रतिक्रिया भी इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।