27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईआरजीसी का दावा: 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15, F-16 ठिकानों पर हमला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईआरजीसी का दावा: 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15, F-16 ठिकानों पर हमला

सारांश

आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी F-35, F-15 और F-16 के ठिकानों पर हमला किया — यह अमेरिकी हमलों का सीधा जवाब है। ट्रंप-हेगसेथ की परमाणु समझौते पर सहमति न होने पर और दबाव बढ़ाने की चेतावनी के बीच मध्य-पूर्व में संघर्ष खतरनाक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15 और F-16 विमानों के ठिकानों पर हमला किया।
कथित निशानों में जॉर्डन , कुवैत और बहरीन के 5 अमेरिकी सैन्य ठिकाने शामिल हैं।
अमेरिकी सेंटकॉम ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर बुधवार शाम 5:15 बजे (ET) ईरान में 'आत्मरक्षा' हमले किए थे।
ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने परमाणु समझौते पर सहमति न होने पर ईरान पर और सैन्य दबाव की चेतावनी दी है।
आईआरजीसी के दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी F-35, F-15 और F-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका के बुधवार शाम किए गए हमलों के जवाब में की गई।

हमले का दायरा और निशाने

इस्लामिक रिपब्लिक ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) की रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों ने कथित तौर पर पाँच सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें मुवाफक अल-साल्टी एयर बेस (जॉर्डन), अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन), अहमद अल-जाबेर एयर बेस (कुवैत), अली अल-सालेम एयर बेस (कुवैत), अमेरिकी 5वें बेड़े का मुख्यालय (बहरीन) और शेख ईसा एयर बेस (बहरीन) शामिल बताए गए हैं।

आईआरजीसी के बयान में दावा किया गया कि मिसाइल हमलों में इन सुविधाओं को 'पूरी तरह नष्ट' कर दिया गया और 'बड़ी संख्या में अमेरिकी लड़ाकू विमान भी तबाह हो गए।' गौरतलब है कि ये दावे स्वतंत्र रूप से अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि बुधवार शाम 5:15 बजे (ईस्टर्न टाइम) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान में कई ठिकानों पर 'आत्मरक्षा' में अतिरिक्त हमले किए गए। सेंटकॉम के अनुसार, ये हमले 'ईरान की लगातार और बिना वजह की आक्रामक गतिविधियों' के जवाब में थे।

इससे पहले उसी दिन सेंटकॉम ने यह भी बताया था कि अमेरिकी बलों ने एक तेल टैंकर को रोका, जो कथित तौर पर अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल ले जा रहा था।

परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि में तनाव

राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान परमाणु समझौते पर वॉशिंगटन के साथ सहमत नहीं होता, तो उस पर सैन्य दबाव और बढ़ाया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पहले से ही गतिरोध में है और मध्य-पूर्व में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।

आगे क्या होगा

आईआरजीसी के दावों पर अमेरिकी रक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है, खासतौर पर यदि दोनों पक्ष परमाणु वार्ता की मेज पर नहीं लौटते। जॉर्डन, कुवैत और बहरीन — तीनों देशों की प्रतिक्रिया भी इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि युद्धकालीन प्रचार में दोनों पक्ष अपनी सफलताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। असली सवाल यह है कि जॉर्डन, कुवैत और बहरीन — तीन सहयोगी अरब देश — इस सीधे हमले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि उनकी चुप्पी या विरोध दोनों ही अमेरिकी गठबंधन की एकजुटता को परखेंगे। परमाणु वार्ता की विफलता को सैन्य कार्रवाई से जोड़ने की ट्रंप प्रशासन की रणनीति ईरान को बातचीत की मेज पर लाने का दबाव बनाती है, लेकिन यह रणनीति उल्टी भी पड़ सकती है यदि तेहरान इसे अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देखे।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरजीसी ने किन ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
आईआरजीसी ने कथित तौर पर जॉर्डन के मुवाफक अल-साल्टी और अल-अजराक एयर बेस, कुवैत के अहमद अल-जाबेर और अली अल-सालेम एयर बेस, तथा बहरीन के अमेरिकी 5वें बेड़े के मुख्यालय और शेख ईसा एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया है। ये दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
ईरान ने यह हमला क्यों किया?
आईआरजीसी के अनुसार, यह हमला अमेरिका द्वारा बुधवार शाम किए गए हमलों का जवाब था। अमेरिकी सेंटकॉम ने उन हमलों को 'ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियों' के जवाब में 'आत्मरक्षा' की कार्रवाई बताया था।
अमेरिका ने ईरान पर हमला कब और क्यों किया?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर बुधवार शाम 5:15 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए गए। सेंटकॉम ने इन्हें 'आत्मरक्षा' में किए गए हमले बताया और ईरानी तेल टैंकर को नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए रोके जाने का भी उल्लेख किया।
परमाणु समझौते का इस संघर्ष से क्या संबंध है?
राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उस पर सैन्य दबाव और बढ़ाया जाएगा। यह सैन्य कार्रवाई परमाणु वार्ता के गतिरोध की पृष्ठभूमि में हो रही है।
क्या आईआरजीसी के दावे सत्यापित हैं?
नहीं, आईआरजीसी के दावे — जिनमें ठिकानों के 'पूरी तरह नष्ट' होने और बड़ी संख्या में विमानों के तबाह होने की बात कही गई है — अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से सत्यापित नहीं हुए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले