ईरान का जवाबी हमला: जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस अल-अजराक को निशाना, 20 में से 18 मिसाइलें नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 9 सितंबर 2026 को तड़के दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी अल-अजराक एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। आईआरजीसी के अनुसार, यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका के कथित 'आक्रामक' हमलों के प्रत्युत्तर में की गई।
हमले का विवरण और निशाना
आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसने अल-अजराक एयर बेस में उस हैंगर को निशाना बनाया जहाँ अमेरिकी एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों की मरम्मत, रखरखाव और तैनाती की जाती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बने एक शेल्टर पर भी मिसाइल दागी गई। आईआरजीसी ने दावा किया कि इस हमले में 'दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया', हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
जॉर्डन की वायु रक्षा की प्रतिक्रिया
जॉर्डन की सेना ने बुधवार को बताया कि उसके वायु रक्षा सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार, शेष दो मिसाइलें सुनसान इलाकों में गिरीं और किसी भी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
अमेरिकी सेना की पूर्व कार्रवाई
इस जवाबी हमले से पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ईरान के पाँच कच्चा तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। ये टैंकर ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के पास मंगलवार को निशाना बनाए गए। सेंटकॉम के अनुसार नष्ट किए गए टैंकरों के नाम एम/टी कविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन-1, एम/टी रिस्को और एम/टी डेर्या थे, जिनमें से अंतिम को खार्ग द्वीप के निकट निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम ने यह भी बताया कि हमले से पूर्व अमेरिकी बलों ने सभी जहाजों के चालक दलों को जहाज छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके बाद जहाजों को इस हालत में पहुँचाया गया कि वे आगे संचालन योग्य न रहें। किसी चालक दल के सदस्य के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
सेंटकॉम ने इन टैंकरों को आईआरजीसी द्वारा संचालित बताया और दावा किया कि ये अरबों डॉलर के उस नेटवर्क का हिस्सा थे जिसका उपयोग ईरानी सैन्य संगठन और उससे जुड़े क्षेत्रीय समूहों को वित्तीय सहायता पहुँचाने के लिए किया जाता था। गौरतलब है कि पिछले चार दिनों में यह ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका की दूसरी सैन्य कार्रवाई थी।
सेंटकॉम ने यह भी बताया कि आईआरजीसी ने दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन युद्धपोत दोनों कथित हमलों से सुरक्षित बच निकला और किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई। हालाँकि, अमेरिकी सेना ने यह नहीं बताया कि किस युद्धपोत को निशाना बनाया गया, हमला कहाँ हुआ और कितनी मिसाइलें दागी गईं।
आगे की स्थिति
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-ईरान तनाव पहले से ही अपने उच्चतम स्तर पर है। विश्लेषकों के अनुसार, खार्ग द्वीप — जो ईरान के तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र है — को निशाना बनाया जाना दोनों देशों के बीच टकराव के एक नए और खतरनाक आयाम को दर्शाता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रियाएँ इस संकट की दिशा तय करेंगी।