जॉर्डन ने दो ड्रोन मार गिराए, अल-अज़राक बेस पर ईरानी हमले के बीच हवाई सुरक्षा सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
जॉर्डन की रॉयल जॉर्डनियन एयर फोर्स ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 की सुबह देश को निशाना बनाकर आ रहे दो ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। जॉर्डन आर्म्ड फोर्सेज (JAF) ने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि इस कार्रवाई में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
मुख्य घटनाक्रम
रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स की विशेष टीमें उन स्थानों पर तत्काल भेजी गईं जहाँ ड्रोन का मलबा गिरा था। टीमों ने निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित किया। JAF ने स्पष्ट किया कि वह जॉर्डन के हवाई क्षेत्र पर 24 घंटे निगरानी बनाए हुए है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान के दावे और पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है। इससे पहले शुक्रवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया था कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अज़राक एयर बेस पर 'जोरदार' हमला किया, जिसमें कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को भारी नुकसान पहुँचा। ईरान ने यह भी दावा किया कि बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों की बैरकों को निशाना बनाया गया, जिससे कुछ अमेरिकी कर्मियों की मौत हुई — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
गुरुवार को ईरान ने यह भी दावा किया था कि उसने अपनी जवाबी कार्रवाई के तहत कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में THAAD एंटी-मिसाइल सिस्टम, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, C-RAM रडार सिस्टम और ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिकी हेलीकॉप्टरों के पुर्जों के एक बड़े गोदाम और मरम्मत-रखरखाव के लिए इस्तेमाल होने वाले एक स्टोरेज साइलो को नष्ट कर दिया गया।
कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने एक ऑस्ट्रियाई प्रसारक को दिए साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका मध्यस्थों के ज़रिए ईरान के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है। बघेई ने कहा कि किसी भी वार्ता की शुरुआत के लिए 'सही माहौल' बनाना ज़रूरी है और आरोप लगाया कि वाशिंगटन ने ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) की 'सभी शर्तों का व्यवहार में उल्लंघन' किया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
गौरतलब है कि जॉर्डन अमेरिका का एक प्रमुख अरब सहयोगी है और उसकी धरती पर अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबे समय से है। इस पृष्ठभूमि में जॉर्डन द्वारा ड्रोन मार गिराने की कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव के बीच उसकी हवाई सुरक्षा की मुस्तैदी को दर्शाती है। विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना मध्य पूर्व में अमेरिकी-ईरानी टकराव के एक नए और खतरनाक चरण का संकेत है।
आगे की स्थिति
अमेरिका और जॉर्डन दोनों की ओर से ईरानी दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन या पुष्टि सामने नहीं आई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अगले कूटनीतिक कदमों पर टिकी हैं।