16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जॉर्डन की एयर डिफेंस ने ईरान की 8 मिसाइलें मार गिराईं, अमेरिका ने भी ईरान पर दूसरे दौर के हमले किए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जॉर्डन की एयर डिफेंस ने ईरान की 8 मिसाइलें मार गिराईं, अमेरिका ने भी ईरान पर दूसरे दौर के हमले किए

सारांश

जॉर्डन की एयर डिफेंस ने ईरान की 8 मिसाइलें मार गिराईं — कोई हताहत नहीं, मलबा सुरक्षित हटाया गया। इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर दूसरे दौर के हमले किए और ईरान ने जॉर्डन व बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया। पश्चिम एशिया में तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

जॉर्डन की एयर डिफेंस सिस्टम ने 16 जुलाई 2026 को ईरान की 8 मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं।
घटना में कोई मौत, घायल या संपत्ति नुकसान नहीं; रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स ने मलबा सुरक्षित हटाया।
अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान पर दूसरे चरण के हमले की पुष्टि की; पहला दौर बुधवार सुबह 6 बजे (ईस्टर्न टाइम) शुरू हुआ था और 90 मिनट चला।
आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक अमेरिकी अड्डे पर हमला कर एफ-15, एफ-16, एफ-35 विमानों और एमक्यू-9 ड्रोन के शेल्टर नष्ट किए।
अमेरिकी हमलों का निशाना होर्मुज स्ट्रेट को खतरा देने वाली ईरानी सैन्य क्षमताएं थीं।

जॉर्डन की सशस्त्र सेना ने 16 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि गुरुवार सुबह देश की ओर दागी गई ईरान की आठ मिसाइलों को उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार यह कार्रवाई तय रक्षा और सैन्य प्रक्रियाओं के तहत की गई, ताकि जॉर्डन की संप्रभुता, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और नागरिकों की सलामती सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

सेना के बयान के मुताबिक, इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचने की जानकारी मिली है। जहाँ-जहाँ मिसाइलों का मलबा गिरा, वहाँ रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स की टीमों ने पहुँचकर उसे सुरक्षित तरीके से हटाया और इलाके को सुरक्षित घोषित किया। जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं ने स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी भविष्य के खतरे का तय नियमों के अनुसार जवाब देने के लिए तैयार हैं।

अमेरिका के ईरान पर दूसरे दौर के हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर तीन बजे अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हमले शुरू किए। सेंटकॉम ने कहा, "इन हमलों का निशाना ईरान की वे सैन्य क्षमताएं हैं, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जाता है।" इससे पहले बुधवार को ईस्टर्न टाइम के अनुसार सुबह 6 बजे ईरान के खिलाफ हमलों का पहला दौर शुरू हुआ था, जो करीब 90 मिनट तक चला। इस अभियान में अमेरिकी सेना ने ग्रेटर तुंब द्वीप पर मौजूद तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइलों के भंडारण व लॉन्च साइटों पर सटीक हमले किए।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया गया कि इन हमलों में सैन्य ढाँचे, लड़ाकू विमानों के शेल्टर, अहम कमांड सेंटर और रणनीतिक ड्रोन को निशाना बनाया गया।

आईआरजीसी के बयान के अनुसार उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, इस हमले में उन शेल्टरों को कथित तौर पर नष्ट किया गया, जहाँ अमेरिकी एफ-15, एफ-16 और एफ-35 लड़ाकू विमान तथा कई एमक्यू-9 रणनीतिक ड्रोन तैनात थे।

क्षेत्रीय तनाव का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। जॉर्डन की भूमिका इस संघर्ष में जटिल है — वह एक ओर अमेरिका का सहयोगी है, तो दूसरी ओर उसकी सीमाएँ ईरान समर्थित ताकतों से प्रभावित क्षेत्रों से सटी हैं। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, जो इस संघर्ष को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी अहम बनाता है।

आगे क्या

जॉर्डन की सेना ने स्पष्ट किया है कि वह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच जॉर्डन जैसे देशों पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे अपनी तटस्थता बनाए रखते हुए अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक देश जो न तो इस युद्ध का पक्षकार है और न ही इसका शुरुआतकर्ता, वह कब तक दूसरों की लड़ाई का मैदान बनता रहेगा। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य आदान-प्रदान में जॉर्डन, बहरीन जैसे देशों की संप्रभुता दाँव पर है — और उनकी 'तटस्थता' तेज़ी से एक भ्रम बनती जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की लड़ाई अब सिर्फ ईरान और अमेरिका की नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की भी है — और इसकी कीमत वे देश चुका रहे हैं जिनका इस संघर्ष में कोई सीधा हित नहीं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जॉर्डन ने ईरान की कितनी मिसाइलें मार गिराईं और कब?
जॉर्डन की एयर डिफेंस सिस्टम ने 16 जुलाई 2026 को गुरुवार सुबह ईरान की 8 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दीं। इस घटना में कोई हताहत या संपत्ति नुकसान नहीं हुआ।
अमेरिका ने ईरान पर कितने दौर के हमले किए हैं?
अमेरिकी सेंटकॉम के अनुसार अब तक दो दौर के हमले हो चुके हैं। पहला दौर बुधवार को ईस्टर्न टाइम के अनुसार सुबह 6 बजे शुरू हुआ और करीब 90 मिनट चला; दूसरा दौर अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर तीन बजे शुरू किया गया।
ईरान के आईआरजीसी ने जॉर्डन में किस ठिकाने पर हमले का दावा किया?
आईआरजीसी ने दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया। ईरान की सरकारी एजेंसी आईआरएनए के अनुसार इसमें एफ-15, एफ-16, एफ-35 विमानों और एमक्यू-9 ड्रोन के शेल्टर कथित तौर पर नष्ट किए गए।
अमेरिकी हमलों का मुख्य निशाना क्या था?
सेंटकॉम के अनुसार हमलों का निशाना ईरान की वे सैन्य क्षमताएं थीं जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करती हैं। पहले दौर में ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइल लॉन्च साइटों पर सटीक हमले किए गए।
जॉर्डन की सेना की मौजूदा स्थिति क्या है?
जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं ने पुष्टि की है कि वे पूरी तरह सतर्क हैं और देश के हवाई क्षेत्र पर लगातार नजर रखे हुए हैं। सेना ने कहा कि किसी भी खतरे का तय नियमों के अनुसार जवाब दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले