16 जुलाई 2026
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नोएडा सेक्टर-3 में मोबाइल नेटवर्क ठप, कर्मचारियों ने ट्राई से ड्राइव टेस्ट की माँग की

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नोएडा सेक्टर-3 में मोबाइल नेटवर्क ठप, कर्मचारियों ने ट्राई से ड्राइव टेस्ट की माँग की

सारांश

6जी की दौड़ में आगे बढ़ते भारत में नोएडा के सेक्टर-3 के कर्मचारी बुनियादी मोबाइल नेटवर्क के लिए जूझ रहे हैं। एयरटेल, जियो और वोडाफोन — सभी नेटवर्क घंटों गायब रहते हैं। ट्राई से ड्राइव टेस्ट की माँग उठी है।

मुख्य बातें

नोएडा सेक्टर-3 और दिल्ली सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरटेल , रिलायंस जियो और वोडाफोन सहित सभी प्रमुख नेटवर्क बार-बार बाधित हो रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार व्यस्त कार्यालय समय में घंटों तक कॉल, एसएमएस और डेटा सेवाएँ ठप रहती हैं।
ट्राई (TRAI) से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल ड्राइव टेस्ट कराने और टेलीकॉम कंपनियों से जवाब माँगने की माँग की गई है।
ट्राई इससे पहले एनडीएमसी क्षेत्र और लुटियंस बंगला जोन में भी ड्राइव टेस्ट करा चुकी है।
ड्राइव टेस्ट में CDR , CSSR , डेटा थ्रूपुट जैसे QoS मानकों की जाँच होती है और परिणाम सार्वजनिक किए जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-3 और दिल्ली से सटे सीमावर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से खराब मोबाइल नेटवर्क और बार-बार कॉल ड्रॉप की समस्या ने कर्मचारियों और व्यवसायों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। 16 जुलाई को सामने आई इन शिकायतों में कर्मचारियों ने भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल ड्राइव टेस्ट कराने की माँग की है। यह स्थिति तब और विरोधाभासी लगती है जब भारत वैश्विक स्तर पर 6जी तकनीक में अग्रणी बनने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

नोएडा के सेक्टर-3 में स्थित विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों के अनुसार, एयरटेल, वोडाफोन और रिलायंस जियो सहित लगभग सभी प्रमुख टेलीकॉम सेवाएँ व्यस्त कार्यालय समय में बाधित हो रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार घंटों तक मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब रहता है, जिससे न कॉल संभव होती है, न एसएमएस भेजा जा सकता है और न ही सोशल मीडिया काम करता है।

सेक्टर-3 की एक निजी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि "यह समस्या अब लगभग रोज़ की हो गई है।" उनके अनुसार इसका सीधा असर रोज़मर्रा के कामकाज और कारोबार पर पड़ रहा है। उन्होंने ट्राई से मामले में तत्काल हस्तक्षेप और टेलीकॉम कंपनियों से जवाबदेही माँगने की अपील की।

कर्मचारियों की परेशानी

सेक्टर-3 में एक निजी रियल एस्टेट सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि नेटवर्क पाने के लिए कभी-कभी कार्यालय से बाहर किसी खास जगह पर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में यह और भी कठिन हो जाता है। परिवार और मित्रों से संपर्क तक संभव नहीं हो पाता, जो सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित करता है।

गौरतलब है कि नोएडा के इन औद्योगिक सेक्टरों में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट, आईटी और अन्य क्षेत्रों की कंपनियाँ संचालित होती हैं। निर्बाध मोबाइल संचार इन व्यवसायों की बुनियादी ज़रूरत है, और इसके बाधित होने से उत्पादकता पर सीधा असर पड़ता है।

ट्राई का पूर्व अनुभव और ड्राइव टेस्ट प्रक्रिया

यह पहली बार नहीं है जब ट्राई के सामने इस तरह की शिकायतें आई हैं। इससे पहले नई दिल्ली के एनडीएमसी क्षेत्र और लुटियंस बंगला जोन (एलबीजेड) में भी कॉल ड्रॉप और कमज़ोर नेटवर्क की उपभोक्ता शिकायतों के बाद ट्राई ने टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के साथ बैठकें कीं और प्रभावित क्षेत्रों में ड्राइव टेस्ट कराए थे।

ड्राइव टेस्ट के दौरान ट्राई वास्तविक समय में नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन करती है। इसमें कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (CDR), कॉल सेटअप सक्सेस रेट (CSSR), डेटा डाउनलोड (DL) और अपलोड (UL) थ्रूपुट जैसे प्रमुख क्वालिटी ऑफ सर्विस (QoS) मानकों की जाँच की जाती है। परीक्षण के परिणाम सार्वजनिक किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी मिले और टेलीकॉम कंपनियाँ सुधारात्मक कदम उठाएँ।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

दूरसंचार विशेषज्ञों के अनुसार, घनी आबादी और औद्योगिक बहुलता वाले शहरी क्षेत्रों में नेटवर्क क्षमता की कमी एक बड़ी समस्या है। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब देश 5जी विस्तार और 6जी तैयारियों में निवेश कर रहा है, जबकि बुनियादी 4जी सेवाएँ भी कई इलाकों में विश्वसनीय नहीं हैं।

आगे क्या

कर्मचारियों और स्थानीय कारोबारियों की माँग है कि ट्राई नोएडा सेक्टर-3 और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में जल्द से जल्द ड्राइव टेस्ट कराए और टेलीकॉम कंपनियों को नेटवर्क सुधारने के लिए बाध्य करे। यदि ट्राई पूर्व की भाँति इस मामले में भी हस्तक्षेप करती है, तो प्रभावित उपभोक्ताओं को निकट भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नियामकीय जवाबदेही का सवाल है। ट्राई के पास शिकायत-आधारित ड्राइव टेस्ट का तंत्र मौजूद है, लेकिन प्रश्न यह है कि यह प्रतिक्रियात्मक क्यों रहता है — स्वतःस्फूर्त निगरानी क्यों नहीं? जब देश 6जी की तैयारी में जुटा है, तब घनी आबादी वाले औद्योगिक सेक्टरों में 4जी की विश्वसनीयता सुनिश्चित न कर पाना एक बुनियादी नीतिगत विरोधाभास है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा सेक्टर-3 में मोबाइल नेटवर्क की समस्या क्या है?
नोएडा के सेक्टर-3 और दिल्ली से सटे सीमावर्ती इलाकों में एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन सहित सभी प्रमुख टेलीकॉम नेटवर्क बार-बार बाधित हो रहे हैं। व्यस्त कार्यालय समय में घंटों तक कॉल, एसएमएस और डेटा सेवाएँ काम नहीं करतीं, जिससे कारोबार और रोज़मर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
ट्राई ड्राइव टेस्ट क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
ट्राई ड्राइव टेस्ट एक वास्तविक समय नेटवर्क गुणवत्ता जाँच प्रक्रिया है जिसमें कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (CDR), कॉल सेटअप सक्सेस रेट (CSSR), और डेटा थ्रूपुट जैसे QoS मानकों का आकलन किया जाता है। परीक्षण के परिणाम सार्वजनिक किए जाते हैं ताकि उपभोक्ता और टेलीकॉम कंपनियाँ दोनों सुधारात्मक कदम उठा सकें।
क्या ट्राई ने पहले भी इस तरह के ड्राइव टेस्ट कराए हैं?
हाँ, इससे पहले नई दिल्ली के एनडीएमसी क्षेत्र और लुटियंस बंगला जोन (एलबीजेड) में कॉल ड्रॉप की शिकायतों के बाद ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ बैठकें कीं और प्रभावित इलाकों में ड्राइव टेस्ट कराए थे।
नोएडा के कर्मचारी ट्राई से क्या चाहते हैं?
कर्मचारियों ने ट्राई से नोएडा सेक्टर-3 और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में तत्काल ड्राइव टेस्ट कराने और एयरटेल, जियो, वोडाफोन जैसी टेलीकॉम कंपनियों से नेटवर्क सुधार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की है।
इस नेटवर्क समस्या से किन लोगों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ रहा है?
नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में काम करने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट सॉफ्टवेयर और अन्य कंपनियों के कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित हैं। व्यवसायों की उत्पादकता और कर्मचारियों का परिवार से संपर्क दोनों बाधित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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