ईरान का दावा: बहरीन, कुवैत, ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, IRGC ने बताया पांचवां चरण
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 13 जुलाई 2026 को दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। IRGC के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर दोबारा किए गए हमलों के जवाब में अपनी जवाबी कार्रवाई के पांचवें चरण का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
अल जजीरा ने IRGC के हवाले से बताया कि ईरानी बलों ने बहरीन के जुफैर स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ओमान में तैनात लंबी दूरी के FPS हवाई निगरानी रडार और वेसल डिटेक्शन रडार पर भी मिसाइल और ड्रोन दागे गए। IRGC ने दावा किया कि ओमान में मौजूद दोनों रडार प्रणालियां पूरी तरह नष्ट कर दी गई हैं — हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
चौथे चरण में कुवैत पर हमले का दावा
IRGC के अनुसार, अपनी जवाबी कार्रवाई के चौथे चरण में उसने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया। दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी सतह-से-सतह मिसाइल बेस को निशाना बनाया गया, जहां दो HIMARS मिसाइल लॉन्चर और मिसाइलों से भरे गोदामों में आग लग गई और वे पूरी तरह नष्ट हो गए। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी वायु रक्षा की कार्रवाई
ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने दावा किया कि बंदर अब्बास क्षेत्र में अमेरिकी निर्मित 'लुकास' आत्मघाती ड्रोन को ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने सटीक निशाना बनाकर मार गिराया। यह दावा भी IRGC-संबद्ध मीडिया स्रोतों से आया है।
बहरीन में एयर रेड अलर्ट
बहरीन के गृह मंत्रालय ने एक बार फिर एयर रेड सायरन बजने की पुष्टि की है। मंत्रालय ने नागरिकों और देश में रह रहे सभी लोगों से शांत रहने, निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने और केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। पिछले कुछ घंटों में बहरीन में कई बार अलर्ट जारी किया जा चुका है।
होर्मुज स्ट्रेट पर चेतावनी
IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित और खुला रखने का एकमात्र रास्ता यह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपना सैन्य हस्तक्षेप समाप्त करे और तटीय देशों की समुद्री संप्रभुता का सम्मान करे। IRGC ने आगाह किया कि यदि अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहा तो वैश्विक तेल और गैस क्षेत्र में इससे भी बड़े संकट और घटनाएं देखने को मिल सकती हैं — यह एक स्पष्ट आर्थिक दबाव की रणनीति मानी जा रही है।