ईरानी मिसाइल हमले: जॉर्डन, कुवैत, बहरीन में तनाव; अरब लीग ने की तत्काल डी-एस्केलेशन की मांग
सारांश
मुख्य बातें
ईरान ने 19 जुलाई 2026 को जॉर्डन, कुवैत और बहरीन पर नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के इस नए दौर ने खाड़ी देशों को सीधे निशाने पर ला दिया है और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
जॉर्डन में मिसाइल हमला और एयर डिफेंस की कार्रवाई
सरकारी प्रसारक जॉर्डन रेडियो एंड टेलीविजन कॉर्पोरेशन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि जॉर्डन के एयर डिफेंस ने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया, जबकि चौथी मिसाइल दक्षिणी जॉर्डन के एक दूरदराज के इलाके में जा गिरी। इस घटना में किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये मिसाइलें दक्षिणी जॉर्डन के तटीय शहर अकाबा में तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों को निशाना बनाकर दागी गईं। अकाबा सीधे इजरायली शहर इलियट से सटा हुआ है, जो इस घटना की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को और बढ़ा देता है।
इजरायल के चैनल 13 न्यूज ने बताया कि मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी सेना ने इलियट से लगभग 18 किलोमीटर उत्तर में स्थित रेमन एयरपोर्ट से रिफ्यूलिंग विमानों को सुरक्षित हटा लिया। इजरायल के सरकारी कान टीवी न्यूज ने भी पुष्टि की कि इस घटना के बाद उस एयरपोर्ट पर वाणिज्यिक उड़ानों में देरी हुई।
अम्मान में अमेरिकी दूतावास ने एक सुरक्षा अलर्ट जारी कर कहा कि अकाबा के एयरपोर्ट और सीपोर्ट को खतरे के मद्देनजर खाली करा लिया गया है और अमेरिकी नागरिकों से अगली सूचना तक वहाँ न जाने को कहा गया। हालाँकि, जॉर्डन के अधिकारियों ने बाद में इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दोनों सुविधाएँ सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
कुवैत पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले
कुवैत की सशस्त्र सेना ने रविवार को घोषणा की कि उसके एयर डिफेंस ने देश के ऊपर आई दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट किया। सेना ने एक्स पर जारी बयान में बताया कि सुबह से ही आने वाले प्रोजेक्टाइलों का पता लगाकर उन पर कार्रवाई की गई, हालाँकि शामिल प्रोजेक्टाइलों की सटीक संख्या नहीं बताई गई।
इसके साथ ही, एक पावर जनरेशन और वॉटर डीसैलिनेशन फैसिलिटी पर हमला हुआ, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। कुवैती सेना ने ईरान पर नागरिक और आवश्यक बुनियादी ढाँचे को लगातार निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिसमें बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन संचालित स्थल शामिल हैं।
अरब लीग और क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रतिक्रिया
अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने इन हमलों पर गंभीर चिंता जताते हुए क्षेत्र में जारी तनाव के विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों से तनाव कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की और कहा कि तनाव बढ़ने से सभी पक्षों को नुकसान होगा। फहमी ने आगाह किया कि यदि हालात काबू से बाहर हुए तो इससे क्षेत्र और उससे परे आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।
जॉर्डन के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अयमान सफादी ने अपने तुर्किए के समकक्ष हकन फिदान और कुवैती विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा से अलग-अलग फोन पर बात की। सफादी ने तनाव समाप्त करने, अमेरिका-ईरान सीजफायर समझौते को लागू करने और तनाव की मूल वजहों के स्थायी समाधान के लिए वार्ता की मेज पर लौटने की आवश्यकता पर बल दिया। जॉर्डन ने ईरानी हमलों के सामने कुवैत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों के साथ अपनी एकजुटता भी व्यक्त की।
व्यापक संदर्भ: अमेरिका-ईरान संघर्ष का बढ़ता दायरा
यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही अपने उच्चतम स्तर पर है। आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर आठ बार हमले किए हैं, जबकि ईरान ने कई क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी ठिकानों और प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमले किए हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब खाड़ी देश इस द्विपक्षीय संघर्ष की जद में आए हों, लेकिन नागरिक बुनियादी ढाँचे — जैसे पानी और बिजली संयंत्र — को सीधे निशाना बनाना इस संकट के एक नए और खतरनाक आयाम की ओर इशारा करता है।
आगे क्या होगा
क्षेत्रीय राजनयिक सक्रिय रूप से वार्ता की संभावनाएँ तलाश रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी अस्थिर हैं। अरब लीग और GCC देशों का दबाव बढ़ रहा है कि अमेरिका और ईरान सीजफायर समझौते का पालन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं लौटते, तब तक खाड़ी देशों में नागरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को खतरा बना रहेगा।