ईरानी मिसाइलें हवा में नष्ट: जॉर्डन में सायरन, अकाबा एयरपोर्ट-बंदरगाह पर अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच जॉर्डन रेडियो एंड टेलीविजन कॉरपोरेशन ने रविवार, 19 जुलाई को पुष्टि की कि जॉर्डन के कई इलाकों में एयर-डिफेंस सायरन बजाए गए। ईरान से दागी गई मिसाइलें जॉर्डन के सबसे दक्षिणी तटीय शहर अकाबा की ओर बढ़ रही थीं, जिन्हें इज़रायली और जॉर्डनी सेनाओं ने मिलकर बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
अकाबा अलर्ट और अमेरिकी दूतावास की चेतावनी
अम्मान स्थित अमेरिकी दूतावास ने उसी दिन एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया, जिसमें कहा गया कि अकाबा हवाई अड्डे और बंदरगाह को एक 'खास और भरोसेमंद खतरे' के कारण खाली करा दिया गया है। दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे अगली सूचना तक इन स्थानों की यात्रा न करें और जॉर्डन में मौजूद सैन्य ठिकानों से दूर रहें।
हालाँकि, जॉर्डन के सरकारी संचार मंत्री मोहम्मद अल मोमानी ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों ने हवाई अड्डे या बंदरगाह को खाली कराने का कोई आदेश नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जॉर्डनी अधिकारी तय प्रक्रिया के अनुसार ही अलर्ट जारी करते हैं, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर आपातकालीन सायरन बजाना भी शामिल है।
आईआरजीसी के दावे और क्षेत्रीय हमले
शनिवार, 18 जुलाई को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया, कुवैत में ईंधन आपूर्ति केंद्र को निशाना बनाया और बहरीन में एक डेटा सेंटर को नष्ट किया। यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी।
ईरानी समाचार एजेंसी सेपाह के अनुसार, आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी अड्डे पर लड़ाकू विमानों के ठिकानों और एक बड़े पार्किंग क्षेत्र को निशाना बनाया। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम दो लड़ाकू विमान और तीन अमेरिकी विमान नष्ट हुए या उन्हें भारी नुकसान पहुँचा। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
व्यापक संदर्भ: अमेरिका-ईरान टकराव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर आठ बार हमले किए हैं, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सुविधाओं को बार-बार निशाना बनाया है। यह ऐसे समय में आया है जब कूटनीतिक चैनल लगभग ठप हैं और दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत की कोई सूचना नहीं है।
गौरतलब है कि जॉर्डन ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है और उसके क्षेत्र में कई पश्चिमी सैन्य सुविधाएँ मौजूद हैं। इस स्थिति में जॉर्डन की सेना का इज़रायल के साथ मिलकर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना क्षेत्रीय गठबंधन की गहराती परतों को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जॉर्डन के अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव और व्यापक रूप लेगा या कूटनीतिक हस्तक्षेप से इसे थामा जा सकेगा।