जॉर्डन ने ईरान की 5 मिसाइलें हवा में नष्ट कीं, अमेरिका ने 10 से अधिक ईरानी शहरों पर हमले किए
सारांश
मुख्य बातें
जॉर्डन की सेना ने 30 जुलाई को दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई पाँच मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। जॉर्डन समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, इस कार्रवाई में कोई हताहत नहीं हुआ। यह घटना उस समय हुई जब अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है।
जॉर्डन की सेना का बयान
जॉर्डन की सशस्त्र सेना ने पेट्रा के माध्यम से जानकारी दी कि मिसाइलों को रोकने के लिए 'इंटरसेप्शन उपाय' किए गए और सभी संभावित खतरों को निष्क्रिय कर दिया गया। सेना ने स्पष्ट किया कि वह 'देश की सुरक्षा और नागरिकों की सलामती को निशाना बनाने वाले किसी भी खतरे से सख्ती से निपटने के लिए उच्चतम स्तर की तैयारियों' के साथ तैनात है।
हालाँकि, जॉर्डन की सेना ने यह नहीं बताया कि कथित मिसाइलें किस क्षेत्र से दागी गई थीं या उन्हें किस स्थान पर इंटरसेप्ट किया गया। यह जानकारी का अभाव स्वतंत्र सत्यापन को कठिन बनाता है।
अमेरिका के ईरान पर हवाई हमले
अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के ईरान के 10 से अधिक शहरों को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केश्म, किश, काजेरून, अहवाज, अबादान, शादेगान, अरवंदकेनार, बुशेहर, जाम और खोरमोज पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए गए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अपने बयान में कहा कि उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन सुविधाएँ, तटीय निगरानी एवं रक्षा ठिकाने और समुद्री सैन्य क्षमताएँ शामिल हैं।
नागरिक हताहत की खबरें
रिपोर्टों के अनुसार, केश्म द्वीप पर एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में एक दंपती और उनके 2 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चे घायल हो गए। यह घटना इस संघर्ष में नागरिक क्षति की गंभीर चिंता को उजागर करती है।
ट्रंप का रुख और पृष्ठभूमि
इन हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, 'उन्होंने हमला करने की कोशिश की, अब हमारी बारी है।' वे पिछले सप्ताह जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी हमले का संदर्भ दे रहे थे। गौरतलब है कि यह टकराव एक ऐसे समय में और गहरा हुआ है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रहा है।
आगे क्या हो सकता है
इस बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह तनाव और बढ़ा तो अन्य देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब किस रूप में देता है।