कुवैत ने ईरानी मिसाइल-ड्रोन हमलों को बताया 'संप्रभुता का खुला उल्लंघन', कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने 3 सितंबर को ईरान की ओर से किए गए लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा करार दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं और क्षेत्र में जारी राजनयिक प्रयासों को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर कर रहे हैं।
हमलों का घटनाक्रम
अमेरिकी सेना द्वारा मंगलवार को ईरान के खिलाफ हमले फिर से शुरू करने के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन, कुवैत, इराक और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। गुरुवार तड़के हुए इन हमलों ने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा को सीधे निशाना बनाया, जिसके बाद कुवैत का यह कड़ा बयान सामने आया।
यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और कई देश राजनयिक रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
कुवैत का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'इन निर्लज्ज हमलों का जारी रहना शत्रुतापूर्ण रवैये को दर्शाता है और यह एक खतरनाक वृद्धि है, जो क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती है।' मंत्रालय ने यह भी कहा कि ये हमले शांति स्थापित करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर कर रहे हैं।
कुवैत ने अपनी संप्रभुता की रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपने क्षेत्र तथा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही।
ईरानी और अमेरिकी नुकसान के दावे
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी हमलों में ईरानी नौसेना के 6 जवान मारे गए हैं। इससे पहले ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि 30 अगस्त से दोबारा शुरू हुए अमेरिकी बमबारी अभियान के बाद अब तक 18 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और 140 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक मृतकों और घायलों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसे इन रिपोर्टों की जानकारी है, लेकिन उसने कभी भी आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
क्षेत्रीय और राजनयिक असर
गौरतलब है कि खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का केंद्र रही है। कुवैत का यह सख्त बयान संकेत देता है कि छोटे खाड़ी देश अब इस संघर्ष में सीधे प्रभावित हो रहे हैं और अपनी तटस्थता बनाए रखना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के स्तर पर सामूहिक प्रतिक्रिया की माँग तेज़ हो सकती है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक हलचल और तेज़ होने की संभावना है।