29 सितंबर 2026
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जम्मू कश्मीर विधानसभा में राज्य दर्जा प्रस्ताव पर BJP का वॉकआउट, स्पीकर हटाने की माँग

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जम्मू कश्मीर विधानसभा में राज्य दर्जा प्रस्ताव पर BJP का वॉकआउट, स्पीकर हटाने की माँग

सारांश

जम्मू कश्मीर विधानसभा में राज्य दर्जा बहाली का प्रस्ताव पारित — BJP का वॉकआउट और स्पीकर हटाने की माँग। CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा खुलासा: उनकी जानकारी के बिना लॉ सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी ने स्पीकर को पत्र लिख दिए — जो साबित करता है कि UT दर्जा सरकार की स्वायत्तता को कैसे सीमित करता है।

मुख्य बातें

BJP विधायकों ने 29 सितंबर 2026 को जम्मू कश्मीर विधानसभा से वॉकआउट किया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव सोमवार को BJP के विरोध के बीच सदन में पारित हुआ।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने की माँग की; BJP का नोटिस 14 दिन बाद सूचीबद्ध होगा।
उमर अब्दुल्ला ने खुलासा किया कि लॉ सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी ने उनकी जानकारी के बिना स्पीकर को प्रस्ताव विरोधी पत्र लिखे।
प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय से मुख्य सचिव के ज़रिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

जम्मू कश्मीर विधानसभा में मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। यह कदम एक दिन पहले — सोमवार को — मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के पारित होने के विरोध में उठाया गया। श्रीनगर स्थित विधानसभा में यह घटनाक्रम जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक नए टकराव की शुरुआत को रेखांकित करता है।

मुख्य घटनाक्रम

BJP विधायकों ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर के उस निर्णय का विरोध किया, जिसमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी थी। पार्टी का आरोप था कि स्पीकर ने वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे वाले प्रस्ताव का उल्लेख होने पर BJP की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इस चर्चा को आगे बढ़ने दिया।

विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने मंगलवार को सदन में स्पीकर को हटाने की माँग दोहराई। BJP ने सोमवार को ही स्पीकर को एक नोटिस देकर उनसे कुर्सी छोड़ने का आग्रह किया था। इस पर राथर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नोटिस नहीं पढ़ा है और सदन की प्रक्रिया के अनुसार, उन्हें हटाने का कोई भी प्रस्ताव 14 दिनों के बाद ही सूचीबद्ध किया जाएगा।

सदन में हंगामा और नकली कार्यवाही

सोमवार को BJP विधायक सदन के बीचोंबीच — वेल में — आ गए और उन्होंने एक नकली कार्यवाही का प्रदर्शन किया। इस भारी हंगामे के बावजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के पक्ष में भाषण दिया और अंततः सदन ने इसे पारित कर दिया।

उमर अब्दुल्ला का बड़ा खुलासा

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने सदन को बताया कि कानून और संसदीय मामलों के मंत्री होने के बावजूद उन्हें बाद में पता चला कि लॉ सेक्रेटरी ने विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर प्रस्ताव के विरुद्ध अपनी राय दे दी थी। अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि चीफ सेक्रेटरी ने भी मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना स्पीकर को पत्र लिखा। उन्होंने इस घटना को जम्मू कश्मीर की केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति से जोड़ते हुए कहा — "ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि हम एक केंद्रशासित प्रदेश हैं।" यह बयान राज्य दर्जे की बहाली की माँग की तात्कालिकता को स्पष्ट करता है।

प्रस्ताव अब केंद्र सरकार के पास

राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसे मुख्य सचिव के पास भेज दिया है, ताकि इसे केंद्र सरकार तक पहुँचाया जा सके। यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह केंद्र पर राजनीतिक दबाव बनाने की एक औपचारिक कोशिश है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के साथ साथ इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था और तब से राज्यत्व की बहाली एक प्रमुख राजनीतिक माँग बनी हुई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू कश्मीर में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद पहली निर्वाचित सरकार सत्ता में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रस्ताव सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस गठबंधन की ओर से एक स्पष्ट संकेत है कि वह राज्यत्व की बहाली के वादे पर गंभीर है। आलोचकों का कहना है कि केंद्र सरकार के बिना किसी स्पष्ट समयसीमा के, यह प्रस्ताव फिलहाल प्रतीकात्मक ही रहेगा। आगे की स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव का किस तरह जवाब देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असल में इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी खबर है — जिसे BJP कांग्रेस के शोर में दबा दिया गया। यह दर्शाता है कि केंद्रशासित प्रदेश का ढाँचा निर्वाचित सरकार की प्रशासनिक पकड़ को किस हद तक कमज़ोर करता है। राज्य दर्जा प्रस्ताव प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन केंद्र सरकार पर इसकी कोई बाध्यता नहीं है; असली सवाल यह है कि क्या यह सदन की भावना अंततः दिल्ली की नीति को प्रभावित कर पाएगी — या यह उन प्रस्तावों की लंबी सूची में जुड़ जाएगी जो अभिलेखागार में दफन हो गए।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू कश्मीर विधानसभा में राज्य दर्जा बहाली का प्रस्ताव क्या है?
यह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश वह प्रस्ताव है जो जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की माँग करता है। यह प्रस्ताव सोमवार, 28 सितंबर 2026 को भाजपा के विरोध के बावजूद सदन में पारित हो गया।
BJP ने जम्मू कश्मीर विधानसभा से वॉकआउट क्यों किया?
BJP का विरोध मुख्यतः स्पीकर अब्दुल रहीम राथर के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें उन्होंने 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे के प्रस्ताव पर BJP की आपत्तियों के बावजूद राज्य दर्जा प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी। पार्टी ने स्पीकर को हटाने की माँग की और नोटिस भी दिया।
उमर अब्दुल्ला ने लॉ सेक्रेटरी के पत्र के बारे में क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने सदन को बताया कि कानून मंत्री होने के बावजूद उन्हें बाद में पता चला कि लॉ सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी ने उनकी जानकारी के बिना स्पीकर को प्रस्ताव के खिलाफ पत्र लिखे। उन्होंने इसे जम्मू कश्मीर की केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति का परिणाम बताया।
राज्य दर्जा प्रस्ताव पारित होने के बाद आगे क्या होगा?
प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसे मुख्य सचिव के पास भेज दिया है, ताकि इसे केंद्र सरकार तक पहुँचाया जा सके। हालाँकि यह प्रस्ताव केंद्र पर बाध्यकारी नहीं है और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर ही इसका भविष्य निर्भर करेगा।
स्पीकर को हटाने का BJP का नोटिस कब प्रभावी होगा?
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने स्पष्ट किया कि सदन की प्रक्रिया के अनुसार उन्हें हटाने का प्रस्ताव नोटिस के 14 दिनों के बाद ही सूचीबद्ध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी नोटिस पढ़ा भी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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