जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टी विवाद: हरि सिंह बनाम शेख अब्दुल्ला, BJP ने किया वॉकआउट
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को उस समय तीखा हंगामा खड़ा हो गया जब सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के एक विधायक ने महाराजा हरि सिंह की जयंती पर घोषित सार्वजनिक अवकाश को रद्द करने या शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की जयंती की छुट्टी बहाल करने की माँग उठाई। इस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आक्रोश में आ गए और अंततः सदन से वॉकआउट कर गए।
मुख्य घटनाक्रम
NC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने सदन में कहा कि सरकार को या तो शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की जयंती (5 दिसंबर) पर छुट्टी बहाल करनी चाहिए, या फिर महाराजा हरि सिंह के जन्मदिन (23 सितंबर) की छुट्टी समाप्त कर देनी चाहिए। इस बयान के साथ ही सदन में शोरगुल शुरू हो गया।
BJP विधायक आर. एस. पठानिया ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ताधारी दल सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि किस आधार पर महाराजा हरि सिंह की जयंती की छुट्टी रद्द करने की बात की जा रही है। BJP विधायकों ने 'महाराजा हरि सिंह अमर रहें' के नारे भी लगाए।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
NC विधायक मुबारक गुल और शमीमा फिरदौस ने शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी बहाल करने की जोरदार माँग की। पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायक वहीद पारा ने भी इस माँग का समर्थन किया और इसे जायज बताते हुए शहीद दिवस (13 जुलाई) की छुट्टी बहाल करने पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब NC सदस्यों ने इस माँग को विधानसभा में उठाया हो।
स्पीकर की फटकार और BJP का वॉकआउट
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विरोध-प्रदर्शन कर रहे BJP विधायकों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि सदन में इस तरह की बाधाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सदन को प्रक्रिया के अनुसार चलना है। आप ऐसा नहीं कर सकते।' इसके बाद BJP विधायकों ने सामूहिक रूप से सदन से वॉकआउट कर लिया।
पृष्ठभूमि: अनुच्छेद 370 के बाद बदली छुट्टियाँ
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद, शहीद दिवस (13 जुलाई) और शेख अब्दुल्ला जयंती (5 दिसंबर) — दोनों सार्वजनिक अवकाश — सरकारी छुट्टियों की सूची से हटा दिए गए थे। इसके बदले महाराजा हरि सिंह की जयंती (23 सितंबर) को नई सार्वजनिक छुट्टी के रूप में शामिल किया गया। यह बदलाव तब से राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या
यह छुट्टी-विवाद जम्मू-कश्मीर की नवनिर्वाचित विधानसभा में क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक प्रतीकों को लेकर गहरे राजनीतिक मतभेदों की झलक देता है। NC सरकार ने अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले सत्रों में भी सदन में गूँजता रहेगा।