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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टी विवाद: हरि सिंह बनाम शेख अब्दुल्ला, BJP ने किया वॉकआउट

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टी विवाद: हरि सिंह बनाम शेख अब्दुल्ला, BJP ने किया वॉकआउट

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टियों का विवाद सिर्फ कैलेंडर का मामला नहीं — यह अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदली पहचान की राजनीति का आईना है। NC की माँग और BJP के वॉकआउट ने दिखाया कि सत्ता और इतिहास की व्याख्या को लेकर संघर्ष अभी थमा नहीं है।

मुख्य बातें

NC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने सदन में माँग उठाई कि शेख अब्दुल्ला जयंती (5 दिसंबर) की छुट्टी बहाल हो या महाराजा हरि सिंह जयंती (23 सितंबर) की छुट्टी रद्द की जाए।
BJP विधायकों ने तीखा विरोध किया, 'महाराजा हरि सिंह अमर रहें' के नारे लगाए और अंततः सदन से वॉकआउट किया।
PDP विधायक वहीद पारा ने NC की माँग का समर्थन किया और शहीद दिवस (13 जुलाई) की छुट्टी बहाल करने पर जोर दिया।
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद शहीद दिवस और शेख अब्दुल्ला जयंती की छुट्टियाँ सरकारी सूची से हटाई गई थीं।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने BJP विधायकों को फटकार लगाई और कहा कि सदन में व्यवधान बर्दाश्त नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को उस समय तीखा हंगामा खड़ा हो गया जब सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के एक विधायक ने महाराजा हरि सिंह की जयंती पर घोषित सार्वजनिक अवकाश को रद्द करने या शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की जयंती की छुट्टी बहाल करने की माँग उठाई। इस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आक्रोश में आ गए और अंततः सदन से वॉकआउट कर गए।

मुख्य घटनाक्रम

NC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने सदन में कहा कि सरकार को या तो शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की जयंती (5 दिसंबर) पर छुट्टी बहाल करनी चाहिए, या फिर महाराजा हरि सिंह के जन्मदिन (23 सितंबर) की छुट्टी समाप्त कर देनी चाहिए। इस बयान के साथ ही सदन में शोरगुल शुरू हो गया।

BJP विधायक आर. एस. पठानिया ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ताधारी दल सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि किस आधार पर महाराजा हरि सिंह की जयंती की छुट्टी रद्द करने की बात की जा रही है। BJP विधायकों ने 'महाराजा हरि सिंह अमर रहें' के नारे भी लगाए।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया

NC विधायक मुबारक गुल और शमीमा फिरदौस ने शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी बहाल करने की जोरदार माँग की। पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायक वहीद पारा ने भी इस माँग का समर्थन किया और इसे जायज बताते हुए शहीद दिवस (13 जुलाई) की छुट्टी बहाल करने पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब NC सदस्यों ने इस माँग को विधानसभा में उठाया हो।

स्पीकर की फटकार और BJP का वॉकआउट

विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विरोध-प्रदर्शन कर रहे BJP विधायकों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि सदन में इस तरह की बाधाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सदन को प्रक्रिया के अनुसार चलना है। आप ऐसा नहीं कर सकते।' इसके बाद BJP विधायकों ने सामूहिक रूप से सदन से वॉकआउट कर लिया।

पृष्ठभूमि: अनुच्छेद 370 के बाद बदली छुट्टियाँ

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद, शहीद दिवस (13 जुलाई) और शेख अब्दुल्ला जयंती (5 दिसंबर) — दोनों सार्वजनिक अवकाश — सरकारी छुट्टियों की सूची से हटा दिए गए थे। इसके बदले महाराजा हरि सिंह की जयंती (23 सितंबर) को नई सार्वजनिक छुट्टी के रूप में शामिल किया गया। यह बदलाव तब से राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।

आगे क्या

यह छुट्टी-विवाद जम्मू-कश्मीर की नवनिर्वाचित विधानसभा में क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक प्रतीकों को लेकर गहरे राजनीतिक मतभेदों की झलक देता है। NC सरकार ने अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले सत्रों में भी सदन में गूँजता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रतीकों पर नियंत्रण केंद्र की नीति से तय हो रहा है। दिलचस्प विरोधाभास यह है कि NC, जो सत्ता में है, उसे अपने ही संस्थापक की जयंती की छुट्टी के लिए विधानसभा में माँग उठानी पड़ रही है। BJP का वॉकआउट रणनीतिक भी है — हरि सिंह के प्रतीक को विपक्ष में रहते हुए भुनाने का मौका। मुख्यधारा की कवरेज इस हंगामे को सतही राजनीति बताती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद निर्वाचित सरकार के पास सार्वजनिक अवकाश तय करने की वास्तविक शक्ति है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टी को लेकर विवाद क्यों हुआ?
NC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने माँग की कि या तो शेख अब्दुल्ला जयंती (5 दिसंबर) की छुट्टी बहाल हो या महाराजा हरि सिंह जयंती (23 सितंबर) की छुट्टी रद्द की जाए। इस बयान पर BJP विधायकों ने तीखा विरोध जताया और अंततः सदन से वॉकआउट कर लिया।
शेख अब्दुल्ला और शहीद दिवस की छुट्टियाँ कब और क्यों हटाई गईं?
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद, शहीद दिवस (13 जुलाई) और शेख अब्दुल्ला जयंती (5 दिसंबर) की सार्वजनिक छुट्टियाँ सरकारी सूची से हटा दी गई थीं। इनके स्थान पर महाराजा हरि सिंह की जयंती (23 सितंबर) को नई सार्वजनिक छुट्टी के रूप में शामिल किया गया।
BJP ने सदन से वॉकआउट क्यों किया?
BJP विधायकों ने NC के लारमी की उस टिप्पणी का विरोध किया जिसमें महाराजा हरि सिंह की जयंती की छुट्टी रद्द करने की बात कही गई थी। BJP ने NC पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया और विधानसभा अध्यक्ष की फटकार के बाद सामूहिक वॉकआउट किया।
PDP का इस विवाद में क्या रुख है?
PDP विधायक वहीद पारा ने NC की माँग का समर्थन किया और इसे जायज बताया। उन्होंने शेख अब्दुल्ला जयंती के साथ-साथ शहीद दिवस (13 जुलाई) की छुट्टी बहाल करने पर भी जोर दिया।
अब आगे क्या होगा — क्या छुट्टियाँ बहाल होंगी?
NC सरकार ने अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है। चूँकि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए इस तरह के बदलावों के लिए केंद्र सरकार की सहमति की भी आवश्यकता हो सकती है। यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्रों में भी उठने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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