22 सितंबर 2026
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एनसी विधायकों की मांग: 5 दिसंबर को शेख अब्दुल्ला जयंती की छुट्टी बहाल हो

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एनसी विधायकों की मांग: 5 दिसंबर को शेख अब्दुल्ला जयंती की छुट्टी बहाल हो

सारांश

2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में छुट्टियों की राजनीति एक अनसुलझा विवाद बनी हुई है। एनसी विधायकों ने विधानसभा में शेख अब्दुल्ला की 5 दिसंबर की जयंती पर अवकाश बहाल करने की माँग उठाकर यह साफ कर दिया है कि सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने 22 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 5 दिसंबर — शेख मोहम्मद अब्दुल्ला जयंती — पर अवकाश बहाल करने की माँग उठाई।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद 2019 में 5 दिसंबर और 13 जुलाई (शहीद दिवस) के अवकाश समाप्त किए गए थे।
एनसी के वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल ने कहा कि 'छुट्टियाँ सामूहिक यादों का प्रतीक होती हैं' और पार्टी ने कभी किसी का अवकाश नहीं हटाया।
23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह जयंती पर दिए जाने वाले अवकाश का भी एनसी विरोध करती है, उन्हें निरंकुश शासक बताते हुए।
शेख अब्दुल्ला के भूमि-सुधार, मुफ्त शिक्षा और महिला-सशक्तिकरण के योगदान को एनसी ने अवकाश बहाली का आधार बताया।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चल रहे सत्र में मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के कई विधायकों ने पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती — 5 दिसंबर — पर सार्वजनिक अवकाश फिर से बहाल करने की माँग जोर-शोर से उठाई। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस अवकाश को समाप्त कर दिया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

एनसी विधायकों ने सदन में तर्क दिया कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर की नींव रखने में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने विशेष रूप से तीन ऐतिहासिक सुधारों का उल्लेख किया — 'जमीन जोतने वाले को जमीन का मालिकाना हक' देने वाला भूमि-सुधार, विश्वविद्यालय स्तर तक मुफ्त शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण की नीतियाँ। उनके अनुसार ये कदम तत्कालीन जम्मू-कश्मीर को एक प्रगतिशील समाज में ढालने के लिए निर्णायक थे।

विधायक मुबारक गुल का बयान

एनसी के वरिष्ठ नेता और विधायक मुबारक गुल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि एनसी ने दशकों तक सत्ता में रहते हुए किसी भी पार्टी की कोई छुट्टी नहीं हटाई — यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) या किसी अन्य दल के नेता के नाम पर स्थापित अवकाश भी बने रहे। उन्होंने कहा, 'छुट्टियाँ सामूहिक यादों का प्रतीक होती हैं।' गुल के अनुसार, 5 दिसंबर का अवकाश बहाल करना जम्मू-कश्मीर के लोगों की ओर से शेख अब्दुल्ला को दी जाने वाली उचित श्रद्धांजलि होगी।

2019 के बाद बदला छुट्टियों का परिदृश्य

अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनने पर जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई (शहीद दिवस) और 5 दिसंबर (शेख अब्दुल्ला जयंती) — दोनों अवकाश समाप्त कर दिए गए। उनके स्थान पर 23 सितंबर को स्वर्गीय महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई। यह बदलाव राजनीतिक रूप से विवादास्पद रहा है।

महाराजा हरि सिंह जयंती पर एनसी का रुख

गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस 23 सितंबर के अवकाश का भी विरोध करती रही है। पार्टी का तर्क है कि महाराजा हरि सिंह एक निरंकुश शासक थे जिन्होंने बिना जनादेश के शासन किया था, इसलिए उनकी स्मृति में सार्वजनिक छुट्टी उचित नहीं है। यह विवाद सीधे तौर पर 2019 के बाद बदली जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान की बहस से जुड़ा है।

आगे क्या होगा

एनसी की यह माँग विधानसभा सत्र के एजेंडे पर औपचारिक रूप से अभी नहीं आई है, लेकिन सदन में उठाई गई यह चर्चा संकेत देती है कि सत्ताधारी दल इसे प्राथमिकता के तौर पर आगे बढ़ाना चाहता है। यह मसला जम्मू-कश्मीर की राज्य पहचान, सांस्कृतिक विरासत और केंद्र-राज्य संबंधों की व्यापक बहस के केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी 'माँगें' विधानसभा की बजाय दिल्ली के दरवाज़े पर दस्तक देती रहेंगी — और यही इस बहस की असली सीमा है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला जयंती पर छुट्टी कब और क्यों हटाई गई थी?
2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 5 दिसंबर (शेख अब्दुल्ला जयंती) और 13 जुलाई (शहीद दिवस) के अवकाश समाप्त कर दिए गए। उनके स्थान पर 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह जयंती पर अवकाश घोषित किया गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस शेख अब्दुल्ला जयंती की छुट्टी क्यों चाहती है?
एनसी का तर्क है कि शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने आधुनिक जम्मू-कश्मीर की नींव रखी — भूमि-सुधार, मुफ्त उच्च शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के जरिये। पार्टी के अनुसार 5 दिसंबर का अवकाश बहाल करना उनके ऐतिहासिक योगदान को उचित सम्मान देना होगा।
एनसी महाराजा हरि सिंह जयंती की छुट्टी का विरोध क्यों करती है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस का मानना है कि महाराजा हरि सिंह एक निरंकुश शासक थे जिन्होंने जनादेश के बिना शासन किया। पार्टी के अनुसार ऐसे शासक की स्मृति में सार्वजनिक अवकाश जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक विरासत के अनुरूप नहीं है।
मुबारक गुल ने विधानसभा में क्या कहा?
एनसी के वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल ने कहा कि उनकी पार्टी ने दशकों तक सत्ता में रहते हुए कभी किसी की छुट्टी नहीं हटाई, यहाँ तक कि BJP के नेताओं के नाम पर घोषित अवकाश भी बनाए रखे। उन्होंने कहा कि 'छुट्टियाँ सामूहिक यादों का प्रतीक होती हैं' और 5 दिसंबर की छुट्टी बहाल होनी चाहिए।
क्या इस माँग पर सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है?
अभी तक इस माँग पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मुद्दा विधानसभा सत्र के दौरान चर्चा में उठाया गया है और आगे औपचारिक प्रस्ताव की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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