दीपावली 2026 शुभ मुहूर्त: वृषभ लग्न में शाम 5:50 से 7:40 बजे तक करें लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजा
सारांश
मुख्य बातें
दीपावली पर्व पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। प्रयागराज की प्रसिद्ध ज्योतिषी शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस वर्ष दीपावली पूजा के लिए वृषभ लग्न का समय — शाम 5 बजकर 50 मिनट से रात 7 बजकर 40 मिनट तक — सर्वाधिक शुभ रहेगा। उनका कहना है कि दीपावली की पूजा सदैव स्थिर लग्न में की जाती है, जिससे मां लक्ष्मी का स्थायी आवास सुनिश्चित होता है।
स्थिर लग्न का महत्व और चार विकल्प
शिप्रा सचदेव के अनुसार दीपावली पूजा के लिए कुल चार स्थिर लग्न होते हैं — वृश्चिक, कुंभ, वृषभ और सिंह। प्रत्येक लग्न का फल और उपयुक्त पूजार्थी वर्ग अलग-अलग होता है। वृश्चिक लग्न प्रातःकाल पड़ता है, इसलिए उसमें पूजा नहीं की जाती।
यह व्यवस्था ज्योतिष शास्त्र की उस मान्यता पर आधारित है कि स्थिर लग्न में किया गया कार्य दीर्घकालिक फल देता है। इसीलिए पीढ़ियों से दीपावली पूजन के लिए इन्हीं लग्नों को प्राथमिकता दी जाती रही है।
व्यापारियों के लिए कुंभ लग्न का मुहूर्त
ज्योतिषी शिप्रा सचदेव ने बताया कि कुंभ लग्न विशेष रूप से व्यापार, व्यवसाय या दुकान से जुड़े लोगों के लिए उपयुक्त है। इस वर्ष कुंभ लग्न का शुभ समय दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। व्यापारी वर्ग इस मुहूर्त में अपने प्रतिष्ठान और घर दोनों जगह पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
वृषभ लग्न — मुख्य पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय
शिप्रा सचदेव ने वृषभ लग्न को तीनों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार वृषभ लग्न शुक्र का नक्षत्र होता है और मां लक्ष्मी का आह्वान शुक्र में ही सर्वोत्तम माना गया है। यह लग्न प्रदोष काल में आता है, जिससे इसमें की गई पूजा का फल और भी अधिक बढ़ जाता है।
इस वर्ष वृषभ लग्न का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 50 मिनट से आरंभ होकर रात 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषी ने स्पष्ट किया कि इस समय घर और कार्यक्षेत्र — दोनों जगह पूजा की जा सकती है।
सिंह लग्न और नकारात्मकता निवारण
शिप्रा सचदेव के अनुसार सिंह लग्न में महाकाली और मां कालरात्रि की पूजा होती है। इस समय मां लक्ष्मी घर में स्थिर वास करती हैं। जिन परिवारों को घर में नकारात्मकता या किसी प्रकार की बाधा का आभास हो, उनके लिए यह लग्न विशेष फलदायी माना गया है।
इस वर्ष सिंह लग्न का मुहूर्त मध्यरात्रि 12 बजकर 40 मिनट से रात 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
धन संरक्षण के लिए विशेष उपाय
पूजा विधि के साथ ज्योतिषी शिप्रा सचदेव ने एक विशेष उपाय भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गोमती चक्र, कौड़ी, धनिया, हल्दी की गांठें, पीली सरसों और दक्षिणा से एक पोटली या कलश तैयार करें और दीपावली पूजन के दौरान इसे मां लक्ष्मी को समर्पित करें।
दीपावली के दो दिन बाद इस पोटली या कलश को बांधकर तिजोरी या जहां धन रखते हों, वहां स्थापित करने से मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है — ऐसा ज्योतिषी का मानना है।
कनकधारा स्तोत्र का विशेष महत्व
शिप्रा सचदेव ने पूजन के दौरान कनकधारा स्तोत्र के पाठ की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि स्वयं पाठ संभव न हो, तो यूट्यूब या किसी अन्य माध्यम पर इसे संपूर्ण दिन चलाया जा सकता है। विशेष रूप से मध्यरात्रि में घर की बेटी द्वारा कनकधारा स्तोत्र पढ़ना अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे मां लक्ष्मी का स्थायी आवास होता है।
दीपावली के इस पर्व पर सही मुहूर्त, विधिवत पूजन और उचित उपायों का संयोग घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है — यह मान्यता सदियों से भारतीय परंपरा में गहरी जड़ें जमाए हुए है।