23 जुलाई 2026 पंचांग: गुप्त नवरात्रि समापन, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06–12:59, मां दुर्गा पूजा शुभ
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन गुप्त नवरात्रि का पारण (समापन) है और मां दुर्गा, भगवान शिव तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित हिंदू काल-गणना पद्धति है, जिसे किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा से पहले अनिवार्य रूप से देखा जाता है।
तिथि और नक्षत्र
23 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि सुबह 7:03 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। सूर्य पुष्य नक्षत्र में गोचर करेगा, जबकि चंद्रमा स्वाति नक्षत्र में रहेगा और रात 11:42 बजे के बाद विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:57 बजे और सूर्यास्त शाम 7:09 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 2:17 बजे और चंद्रास्त रात 1:10 बजे होगा। राशि परिवर्तन के संदर्भ में, सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा तुला राशि में संचार करेगा और शाम लगभग 7 बजे के बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा।
शुभ मुहूर्त और योग
गुरुवार को दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में राहुकाल या किसी अन्य अशुभ समय की चिंता किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापारिक गतिविधि आरंभ की जा सकती है। योग की दृष्टि से, सुबह 6:50 बजे तक हर्षण योग प्रभावी रहेगा, इसके पश्चात शुभ योग आरंभ होगा जो पूरे दिन और रात तक बना रहेगा।
अशुभ काल और परहेज
ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार 23 जुलाई को निम्नलिखित अशुभ समयों में नए कार्य प्रारंभ करने से बचना चाहिए — राहुकाल: दोपहर 2:10 बजे से 3:52 बजे तक; गुलिक काल: सुबह 8:43 बजे से 10:24 बजे तक; यमगंड काल: सुबह 5:57 बजे से 7:36 बजे तक। इसके अतिरिक्त, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचना उचित है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
पूजा और धार्मिक महत्व
गुप्त नवरात्रि के समापन के अवसर पर मां दुर्गा की विशेष आराधना, भगवान शिव का अभिषेक और भगवान गणेश की पूजा इस दिन विशेष फलदायी मानी गई है। शुभ योग और अभिजित मुहूर्त का संयोग इस दिन को धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल बनाता है। आने वाले दिनों में आषाढ़ माह के अन्य व्रत-त्योहारों की तैयारी भी इसी पंचांग-क्रम के अनुसार की जा सकती है।