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24 जून 2026 पंचांग: अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54–12:44, परिघ-शिव योग; राहुकाल से रहें सावधान

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24 जून 2026 पंचांग: अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54–12:44, परिघ-शिव योग; राहुकाल से रहें सावधान

सारांश

24 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:44 बजे तक — नए कार्य, पूजा और निर्णयों के लिए दिन का सबसे शुभ समय। परिघ-शिव योग का संयोग, लेकिन राहुकाल और उत्तर दिशाशूल से सावधानी ज़रूरी।

मुख्य बातें

तिथि: 24 जून 2026 (बुधवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी — शाम 6:12 बजे तक; तत्पश्चात एकादशी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:44 बजे तक — शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय।
अमृत काल सुबह 7:32–9:17 और ब्रह्म मुहूर्त 4:10–4:58 बजे ।
राहुकाल 12:22–2:05 , गुलिक काल 11:51–1:34 और यमघण्टकाल 7:30–9:15 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
इस दिन परिघ योग और शिव योग ; सूर्य आर्द्रा नक्षत्र , चंद्रमा चित्रा से स्वाति में गोचर।
उत्तर दिशाशूल — उत्तर दिशा में यात्रा से बचें।

हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग के अनुसार 24 जून 2026 (बुधवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है, जो शाम 6:12 बजे तक रहेगी — इसके पश्चात एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। जो लोग इस दिन कोई महत्वपूर्ण कार्य, पूजा-पाठ या निवेश की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:44 बजे तक सर्वाधिक शुभ रहेगा।

तिथि, नक्षत्र और योग

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जो राहु के आधिपत्य वाला नक्षत्र है। चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेगा और बाद में स्वाति नक्षत्र में गोचर करेगा। योग की दृष्टि से इस दिन परिघ योग और शिव योग का संयोग बन रहा है। गौरतलब है कि इस दिन हर्षण योग या वज्र योग नहीं है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

24 जून 2026 को सूर्योदय सुबह 5:46 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चन्द्रोदय दोपहर 3:35 बजे और चन्द्रास्त रात 1:54 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:10 से 4:58 बजे तक रहेगा, जो ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम माना जाता है। अमृत काल सुबह 7:32 से 9:17 बजे तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त: अभिजित काल

दिन के मध्य में स्थित अभिजित मुहूर्त (दोपहर 11:54 से 12:44 बजे) को पंचांग शास्त्र में दिन का सबसे शक्तिशाली और फलदायी समय माना जाता है। इस अवधि में नए कार्य का आरंभ, व्यापारिक निर्णय, पूजा-अनुष्ठान या यात्रा की शुरुआत अत्यंत शुभ फल देती है।

अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक और यमघण्टकाल

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीन अशुभ कालखंड हैं — राहुकाल दोपहर 12:22 से 2:05 बजे तक, गुलिक काल सुबह 11:51 से दोपहर 1:34 बजे तक, और यमघण्टकाल सुबह 7:30 से 9:15 बजे तक। इन समयावधियों में कोई नया शुभ कार्य प्रारंभ न करने की परंपरागत सलाह दी जाती है।

राशि स्थिति और दिशाशूल

इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार 24 जून 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए उत्तर दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपाय अपनाए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यावहारिक जीवन-प्रबंधन का साधन है जिसे शहरी और ग्रामीण दोनों वर्ग समान रूप से देखते हैं। यह उल्लेखनीय है कि अभिजित मुहूर्त और राहुकाल का आंशिक ओवरलैप — दोनों दोपहर के आसपास — पाठकों के लिए व्यावहारिक भ्रम की स्थिति बना सकता है, जिसे स्पष्ट समय-सीमाओं के साथ रेखांकित करना ज़रूरी है। पंचांग की प्रासंगिकता केवल आस्था तक सीमित नहीं — यह सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक समय-बोध का प्रतिबिंब भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

24 जून 2026 को सबसे शुभ समय कौन सा है?
24 जून 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:44 बजे तक सबसे शुभ समय है। इसे दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है, जो नए कार्य, पूजा और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए उत्तम है।
24 जून 2026 को राहुकाल कितने बजे से है?
24 जून 2026 (बुधवार) को राहुकाल दोपहर 12:22 से 2:05 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
24 जून 2026 को कौन सी तिथि है?
24 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है, जो शाम 6:12 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी।
24 जून 2026 को कौन से योग बन रहे हैं?
इस दिन परिघ योग और शिव योग का संयोग है। हर्षण योग या वज्र योग इस दिन नहीं हैं।
24 जून 2026 को किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए?
24 जून 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल है। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपाय अपनाए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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