21 जून 2026 का पंचांग: अभिजित मुहूर्त सुबह 11:29 से 12:17 बजे तक, पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 21 जून 2026 (रविवार) का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो दोपहर 3:20 बजे तक रहेगी, उसके पश्चात अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। जो लोग इस दिन कोई शुभ कार्य, पूजा-अर्चना या महत्वपूर्ण निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक सर्वाधिक अनुकूल रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
पंचांग गणना के अनुसार 21 जून 2026 को सूर्योदय सुबह 5:46 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 11:55 बजे और चंद्रास्त रात 12:15 बजे रहेगा। ग्रह स्थिति की दृष्टि से इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में विराजमान हैं।
नक्षत्र और योग
इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सुबह 9:31 बजे तक रहेगा, जिसके बाद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग की बात करें तो 21 जून 2026 को सिद्धि योग रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। उल्लेखनीय है कि वज्र योग एक दिन पूर्व 20 जून 2026 को था, तथा इस दिन हर्षण योग भी नहीं रहेगा।
अभिजित मुहूर्त और शुभ समय
पंचांग के अनुसार दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त होता है। 21 जून को यह मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस कालखंड में नए कार्य का आरंभ, पूजा-पाठ या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना विशेष फलदायी माना जाता है।
राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्टकाल
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कुछ समयखंड अशुभ माने जाते हैं, जिनमें नए कार्य आरंभ करने से बचना उचित रहता है। 21 जून को राहुकाल शाम 5:33 बजे से 7:17 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 3:54 बजे से शाम 5:40 बजे तक और यमघण्टकाल सूर्योदय से सुबह 7:14 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार 21 जून 2026 (रविवार) को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। इस कारण इस दिन पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी अनिवार्य कारण से पश्चिम दिशा में यात्रा करनी हो, तो ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उचित ज्योतिषीय उपायों का पालन करना हितकर रहता है।