27 जून 2026 पंचांग: शनि प्रदोष व्रत आज, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:16–12:56 बजे
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 (शनिवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन शनि प्रदोष व्रत पड़ रहा है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि रात 12:43 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी आरंभ होगी। यह दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति
27 जून 2026 को सूर्योदय सुबह 5:47 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चन्द्रोदय शाम 5:17 बजे और चन्द्रास्त रात 3:58 बजे होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिनके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में विचरण करेंगे और उनकी राशि धनु रहेगी। इसके अतिरिक्त, सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।
शुभ मुहूर्त और अमृत काल
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:16 से 12:56 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है, जिसमें नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना फलदायी होता है। इसके अलावा अमृत काल सुबह 10:29 से 12:17 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक रहेगा।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्टकाल
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राहुकाल सुबह 9:21 से 11:02 बजे तक, गुलिक काल सुबह 6:00 से 7:41 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 2:23 से 4:04 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है।
योग और दिशाशूल
वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को साध्य योग प्रभावी रहेगा; इस दिन कोई वज्र योग नहीं है। ज्योतिष और वास्तु के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दिशाशूल रहेगा। यदि इन दिशाओं में यात्रा अनिवार्य हो तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत 'शनि प्रदोष' कहलाता है और इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और शनिदेव की एक साथ उपासना करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और शनि की साढ़ेसाती व ढैया के कुप्रभाव कम होते हैं। आगामी दिनों में भी पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर ही कार्य आरंभ करने की परंपरा जारी रहेगी।