हवाई अड्डा संचालकों पर एयरलाइन चलाने की कोई केंद्रीय नीतिगत रोक नहीं: नागर विमानन मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 10 अगस्त 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि देश में ऐसी कोई सरकारी नीति अस्तित्व में नहीं है जो प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या उनका संचालन करने से प्रतिबंधित करती हो। हालांकि, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अंतर्गत विकसित कुछ हवाई अड्डों के रियायत समझौतों में स्वामित्व संबंधी विशेष सीमाएं ज़रूर निर्धारित हैं।
मंत्री का स्पष्टीकरण
नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'ऐसी कोई सरकारी नीति नहीं है जो प्रमुख हवाई अड्डों के ऑपरेटरों को एयरलाइनों में पर्याप्त हिस्सेदारी रखने या एयरलाइन संचालन से प्रतिबंधित करती हो।' यह बयान एयरपोर्ट-एयरलाइन क्रॉस-ओनरशिप को लेकर उद्योग जगत में चल रही बहस के बीच आया है।
PPP अनुबंधों में मौजूद शर्तें
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि PPP मॉडल पर विकसित कुछ हवाई अड्डों के रियायत समझौतों में विशेष प्रावधान हैं। इन प्रावधानों के तहत अनुसूचित एयरलाइनों या उनसे जुड़ी समूह कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं के लिए हवाई अड्डा संचालन करने वाली कंसेशनायर कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी रखने पर सीमाएं लागू हैं।
मोहोल ने कहा, 'PPP मॉडल के तहत संचालित कुछ हवाई अड्डों के मौजूदा अनुबंधों में यह शर्त शामिल है कि अनुसूचित एयरलाइंस या उनसे जुड़ी संस्थाएं कंसेशनायर कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी नहीं रख सकतीं।'
AAI को मिला छूट का अनुरोध
सरकार ने पुष्टि की कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को एक औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिसमें संबंधित अनुबंध की इन्हीं शर्तों में छूट देने की माँग की गई है। यदि यह छूट दी जाती है, तो किसी हवाई अड्डा संचालक के लिए एयरलाइन कारोबार में प्रवेश का रास्ता खुल सकता है।
मंत्री ने बताया कि यह अनुरोध AAI के पास पहुँच चुका है, किंतु अब तक नागर विमानन मंत्रालय ने इस मामले की कोई औपचारिक समीक्षा नहीं की है। उन्होंने कहा, 'इस विषय पर अभी नागर विमानन मंत्रालय द्वारा विचार नहीं किया गया है।'
विमानन क्षेत्र में बढ़ती रुचि का संदर्भ
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत का विमानन क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है और निजी निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच एकीकृत व्यावसायिक मॉडल को लेकर उद्योग जगत में रुचि स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब कई बड़े औद्योगिक समूह भारतीय विमानन बाज़ार में अपनी उपस्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
सरकार के इस जवाब से संकेत मिलता है कि एयरपोर्ट-एयरलाइन क्रॉस-ओनरशिप पर कोई व्यापक नीतिगत बाधा नहीं है, लेकिन PPP अनुबंधों की शर्तें ऐसी व्यवस्थाओं को सीमित करती हैं। AAI द्वारा प्राप्त छूट अनुरोध पर मंत्रालय की समीक्षा का परिणाम यह तय करेगा कि भविष्य में हवाई अड्डा-एयरलाइन एकीकरण की दिशा क्या होगी।