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धनतेरस 2026: 6 नवंबर को शाम 6:02 से 7:57 बजे तक शुभ मुहूर्त, महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया धन्वंतरि-लक्ष्मी पूजा का महत्व

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धनतेरस 2026: 6 नवंबर को शाम 6:02 से 7:57 बजे तक शुभ मुहूर्त, महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया धन्वंतरि-लक्ष्मी पूजा का महत्व

सारांश

धनतेरस 2026 इस बार 6 नवंबर को, शाम 6:02 से 7:57 बजे तक सर्वोत्तम पूजा मुहूर्त। कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया — स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है, इसीलिए धन्वंतरि की पूजा इस पर्व की आत्मा है।

मुख्य बातें

धनतेरस का पर्व इस वर्ष 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को सायं 6:02 बजे से रात्रि 7:57 बजे तक रहेगा।
प्रदोष काल सायं 5:33 बजे से रात्रि 8:09 बजे तक व्याप्त रहेगा।
कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक रहेगी।
इस दिन भगवान धन्वंतरि , मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है।
सोना-चाँदी, आभूषण या बर्तन — इस दिन की गई प्रत्येक खरीदारी समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

धनतेरस का पर्व इस वर्ष 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की इस तिथि पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व है। कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस पर्व के शुभ मुहूर्त, परंपराओं और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

शुभ मुहूर्त और तिथि का विवरण

कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 30 मिनट से आरंभ होगी और 7 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूँकि धनतेरस की पूजा परंपरागत रूप से प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह उत्सव 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा।

महंत जी ने बताया कि पूजा का सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को सायं 6 बजकर 2 मिनट से रात्रि 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल सायं 5 बजकर 33 मिनट से रात्रि 8 बजकर 9 मिनट तक व्याप्त रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा-अर्चना तथा खरीदारी अत्यंत शुभ फलदायक मानी जाती है।

खरीदारी की परंपरा और समृद्धि का प्रतीक

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि धनतेरस पर नई वस्तुओं की खरीदारी करने की परंपरा सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा से जुड़ी हुई है। इस दिन विशेष रूप से सोना-चाँदी और आभूषण खरीदे जाते हैं। जो श्रद्धालु सोना-चाँदी खरीदने में सक्षम नहीं होते, वे बर्तन खरीदकर भी इस परंपरा का पालन करते हैं, क्योंकि इस तिथि पर की गई प्रत्येक खरीदारी को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

भगवान धन्वंतरि की पूजा का आध्यात्मिक महत्व

महंत जी ने बताया कि भगवान धन्वंतरि देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के जनक हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही उनका प्राकट्य हुआ था। इसीलिए इस तिथि पर उनकी उपासना विशेष रूप से की जाती है।

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है — धर्म के प्रत्येक अनुष्ठान और जीवन के प्रत्येक कार्य को सुचारु रूप से संपन्न करने के लिए स्वस्थ शरीर अनिवार्य है। यही कारण है कि पाँच दिवसीय दीपोत्सव का यह पहला दिन स्वास्थ्य के देवता के स्मरण से आरंभ होता है।

आम जनता पर असर

धनतेरस के अवसर पर देशभर में सोना-चाँदी, इलेक्ट्रॉनिक्स और बर्तनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। यह पर्व व्यापारिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि करोड़ों परिवार इस दिन नई खरीदारी को शुभ मानकर बाज़ार में उतरते हैं। गौरतलब है कि यह पर्व दीपावली से दो दिन पूर्व मनाया जाता है और पाँच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ इसी से होता है।

क्या होगा आगे

धनतेरस के पश्चात 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) और 8 नवंबर को मुख्य दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि शुभ मुहूर्त में पूजा संपन्न करने के बाद ही खरीदारी करें, ताकि परंपरा का पूर्ण लाभ मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत का स्वास्थ्य-केंद्रित दृष्टिकोण इस पर्व की मूल भावना को सामने लाता है — कि समृद्धि की नींव धन नहीं, स्वस्थ जीवन है। आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि की पूजा का उल्लेख ऐसे समय में प्रासंगिक है जब देश सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को लेकर गंभीर बहसों से गुज़र रहा है। धर्म और आरोग्य के इस संगम पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026 कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
धनतेरस 2026 का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त उस दिन सायं 6 बजकर 2 मिनट से रात्रि 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल सायं 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक व्याप्त रहेगा।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?
मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि — देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के जनक — का प्राकट्य हुआ था। महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है, इसीलिए इस पर्व पर उनकी उपासना का विशेष महत्व है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर सोना-चाँदी और आभूषण खरीदना परंपरागत रूप से सबसे शुभ माना जाता है। जो लोग यह नहीं खरीद पाते, वे बर्तन खरीदकर भी इस परंपरा को निभाते हैं। इस दिन की गई प्रत्येक खरीदारी समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक मानी जाती है।
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को कितने बजे से शुरू होगी?
कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 30 मिनट से आरंभ होगी और 7 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल की उपस्थिति के कारण पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा।
धनतेरस के बाद कौन-से त्योहार आते हैं?
धनतेरस पाँच दिवसीय दीपोत्सव का पहला दिन है। इसके अगले दिन 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) और 8 नवंबर को मुख्य दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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