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धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों है शुभ? लक्ष्मी पूजा से जुड़ा धार्मिक महत्व जानें

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धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों है शुभ? लक्ष्मी पूजा से जुड़ा धार्मिक महत्व जानें

सारांश

धनतेरस पर झाड़ू सिर्फ एक घरेलू वस्तु नहीं — यह लक्ष्मी वास का प्रतीक है। स्वच्छता से समृद्धि तक, वास्तु शास्त्र से धार्मिक मान्यता तक, जानिए क्यों इस साधारण चीज़ की खरीदारी धनतेरस पर असाधारण मानी जाती है।

मुख्य बातें

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।
झाड़ू घर से नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता दूर करती है; नई झाड़ू पर सफेद धागा बाँधने की भी परंपरा है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) कोण सबसे शुभ है।
झाड़ू को ईशान कोण , मंदिर या रसोई के पास नहीं रखना चाहिए।
परंपरा के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू सम संख्या में खरीदना शुभ माना जाता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले धनतेरस के पावन अवसर पर झाड़ू की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। धन, समृद्धि और आरोग्य के इस पर्व पर जहाँ सोना, चाँदी, बर्तन और वाहन खरीदने की परंपरा प्रचलित है, वहीं एक साधारण-सी दिखने वाली झाड़ू का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व किसी बहुमूल्य वस्तु से कम नहीं। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में झाड़ू को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।

लक्ष्मी वास और झाड़ू का संबंध

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी का स्थायी वास केवल उसी घर में होता है जो साफ-सुथरा और स्वच्छ हो। झाड़ू घर की गंदगी, नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को बाहर करने का माध्यम मानी जाती है, इसीलिए इसे देवी लक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है। धनतेरस पर नई झाड़ू घर लाने से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

जिन परिवारों में आर्थिक तंगी या कर्ज की समस्या हो, उनके लिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदकर पूजा-अर्चना करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस उपाय से आर्थिक संकट दूर होता है और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। कई घरों में इस दिन नई झाड़ू पर सफेद धागा बाँधने की भी परंपरा है।

वास्तु शास्त्र में झाड़ू रखने की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) की दिशा सबसे शुभ मानी गई है। इसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), मंदिर या रसोई के पास कभी नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है।

झाड़ू को सदैव घर के किसी ऐसे कोने में छिपाकर रखना चाहिए जहाँ बाहरी लोगों की नज़र आसानी से न पड़े। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को मुख्य दरवाज़े के सामने खुले में रखने से आने-जाने वालों की नज़र पड़ती है, जिसे देवी लक्ष्मी का अनादर माना जाता है और इससे घर में धन की रुकावट आ सकती है।

झाड़ू खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर झाड़ू हमेशा सम संख्या में — आमतौर पर एक या जोड़े में — खरीदना शुभ होता है। झाड़ू को कभी भी पैरों से न छुएँ और इसे टूटी-फूटी अवस्था में घर में न रखें, क्योंकि ऐसा करना नकारात्मकता को आमंत्रण देना माना जाता है।

गौरतलब है कि यह मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं। विद्वानों के अनुसार, झाड़ू का प्रतीक स्वच्छता के माध्यम से समृद्धि आमंत्रित करने की उस भारतीय सोच को दर्शाता है, जो 'स्वच्छ घर में ही देवी का वास' की अवधारणा पर टिकी है।

धनतेरस का व्यापक महत्व

धनतेरस का पर्व दीपावली से दो दिन पूर्व मनाया जाता है और इसे धन्वंतरि जयंती के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि — आयुर्वेद के देवता — की पूजा की जाती है। धन और स्वास्थ्य दोनों के प्रतीक इस पर्व पर झाड़ू की खरीदारी इन दोनों मूल्यों — स्वच्छता और समृद्धि — को एक साथ साधने का प्रतीकात्मक प्रयास है।

आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा भारतीय घरों में उतनी ही प्रासंगिक बनी रहेगी, क्योंकि यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि स्वच्छता और सकारात्मकता के प्रति एक सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर रोज़मर्रा की वस्तु को सांस्कृतिक अर्थ देती है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है — कि समृद्धि स्वच्छता से आती है। हालाँकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, फिर भी ये पीढ़ियों से भारतीय घरों में जीवित हैं और सामूहिक सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार झाड़ू घर से नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को बाहर करती है, इसलिए इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। साफ-सुथरे घर में ही माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है, इसीलिए धनतेरस पर नई झाड़ू लाना शुभ माना जाता है।
झाड़ू को घर में कहाँ रखना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) सबसे शुभ दिशाएँ हैं। इसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), मंदिर या रसोई के पास कभी नहीं रखना चाहिए।
धनतेरस पर झाड़ू कितनी संख्या में खरीदनी चाहिए?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू सम संख्या में — आमतौर पर एक या जोड़े में — खरीदना शुभ माना जाता है। विषम संख्या में खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
झाड़ू को मुख्य दरवाज़े के सामने क्यों नहीं रखना चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार झाड़ू को मुख्य दरवाज़े के सामने खुले में रखने से आने-जाने वालों की नज़र उस पर पड़ती है, जिसे देवी लक्ष्मी का अनादर माना जाता है। इससे घर में धन की रुकावट आ सकती है, इसलिए इसे छिपाकर रखने की सलाह दी जाती है।
धनतेरस और धन्वंतरि जयंती में क्या संबंध है?
धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी जाना जाता है, जो आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व दीपावली से दो दिन पूर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है और धन व स्वास्थ्य दोनों का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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