धनतेरस 2026: 6 नवंबर को मनाएँ त्योहार, जानें खरीदारी मुहूर्त, यम दीप की मान्यता और पूजा विधि
सारांश
मुख्य बातें
धनतेरस 2026 इस वर्ष 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जब कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:31 बजे से आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान धनवंतरि, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपरा के अनुसार, 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खरीदारी का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके उपरांत शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक पूजा का विशेष मुहूर्त निर्धारित है। इस मुहूर्त में भगवान धनवंतरि और कुबेर की विधिवत पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
नई चीजें क्यों खरीदी जाती हैं धनतेरस पर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में धन-धान्य और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है। इस दिन विशेष रूप से सोने-चाँदी के आभूषण, पीतल के नए बर्तन, मिट्टी के दीये और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। गौरतलब है कि झाड़ू को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इसे घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।
पूजा विधि और घर की तैयारी
धनतेरस के दिन श्रद्धालुओं को सूर्योदय से पहले उठकर घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। स्नान के पश्चात भगवान कुबेर और धनवंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजन करना चाहिए। साथ में माता लक्ष्मी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मिट्टी के नए दीये खरीदकर उन्हें जलाने की परंपरा है, जो मान्यतानुसार घर से नकारात्मकता दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करती है।
यम दीप की मान्यता और महत्त्व
धनतेरस की शाम यम दीप जलाने की परंपरा विशेष धार्मिक महत्त्व रखती है। यह दीपक यमराज के नाम से जलाया जाता है और इसका मुख दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दीप को जलाने से परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार की दीर्घायु की कामना पूरी होती है। यह परंपरा धनतेरस को केवल संपदा के उत्सव तक सीमित न रखकर जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा का पर्व भी बनाती है। आने वाले दिनों में दीपावली की तैयारियाँ अपने चरम पर होंगी और धनतेरस इस उत्सव श्रृंखला की शुभ शुरुआत मानी जाती है।