1 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धनतेरस 2026: 6 नवंबर को मनाएँ त्योहार, जानें खरीदारी मुहूर्त, यम दीप की मान्यता और पूजा विधि

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धनतेरस 2026: 6 नवंबर को मनाएँ त्योहार, जानें खरीदारी मुहूर्त, यम दीप की मान्यता और पूजा विधि

सारांश

धनतेरस 2026 इस बार 6 नवंबर को है। सोने-चाँदी की खरीदारी से लेकर यम दीप जलाने तक — यह पर्व केवल संपदा का नहीं, स्वास्थ्य और दीर्घायु का भी उत्सव है। जानें सही मुहूर्त, पूजा विधि और हर परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता।

मुख्य बातें

धनतेरस 2026 का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
कार्तिक त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:31 बजे से 7 नवंबर सुबह 10:48 बजे तक रहेगी।
खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक; पूजा मुहूर्त शाम 6:18 से रात 8:10 बजे तक।
इस दिन सोना-चाँदी, पीतल के बर्तन, मिट्टी के दीये और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है।
यम दीप शाम को दक्षिण दिशा में मुख रखकर जलाया जाता है, जो अकाल मृत्यु के भय को दूर करने की मान्यता रखता है।
भगवान धनवंतरि, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा इस दिन अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

धनतेरस 2026 इस वर्ष 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जब कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:31 बजे से आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान धनवंतरि, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

धनतेरस का शुभ मुहूर्त

धार्मिक परंपरा के अनुसार, 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खरीदारी का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके उपरांत शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक पूजा का विशेष मुहूर्त निर्धारित है। इस मुहूर्त में भगवान धनवंतरि और कुबेर की विधिवत पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

नई चीजें क्यों खरीदी जाती हैं धनतेरस पर

धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में धन-धान्य और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है। इस दिन विशेष रूप से सोने-चाँदी के आभूषण, पीतल के नए बर्तन, मिट्टी के दीये और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। गौरतलब है कि झाड़ू को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इसे घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।

पूजा विधि और घर की तैयारी

धनतेरस के दिन श्रद्धालुओं को सूर्योदय से पहले उठकर घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। स्नान के पश्चात भगवान कुबेर और धनवंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजन करना चाहिए। साथ में माता लक्ष्मी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मिट्टी के नए दीये खरीदकर उन्हें जलाने की परंपरा है, जो मान्यतानुसार घर से नकारात्मकता दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करती है।

यम दीप की मान्यता और महत्त्व

धनतेरस की शाम यम दीप जलाने की परंपरा विशेष धार्मिक महत्त्व रखती है। यह दीपक यमराज के नाम से जलाया जाता है और इसका मुख दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दीप को जलाने से परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार की दीर्घायु की कामना पूरी होती है। यह परंपरा धनतेरस को केवल संपदा के उत्सव तक सीमित न रखकर जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा का पर्व भी बनाती है। आने वाले दिनों में दीपावली की तैयारियाँ अपने चरम पर होंगी और धनतेरस इस उत्सव श्रृंखला की शुभ शुरुआत मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और परिवार की रक्षा का संकल्प भी है। बाज़ारवाद के बढ़ते प्रभाव में इस धार्मिक-सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखना ही इस त्योहार की असली प्रासंगिकता है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026 कब है और तिथि क्या है?
धनतेरस 2026 का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे से आरंभ होकर 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे समाप्त होगी।
धनतेरस 2026 का खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
6 नवंबर को खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रहेगा। इसके बाद शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक पूजा का विशेष मुहूर्त निर्धारित है।
धनतेरस के दिन कौन-सी चीजें खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर सोने-चाँदी के आभूषण, पीतल के नए बर्तन, मिट्टी के दीये और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी से घर में धन-धान्य और सुख-संपन्नता बढ़ती है।
यम दीप क्या है और इसे धनतेरस पर क्यों जलाते हैं?
यम दीप धनतेरस की शाम यमराज के नाम पर जलाया जाने वाला दीपक है, जिसका मुख दक्षिण दिशा में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे जलाने से परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और दीर्घायु की कामना पूरी होती है।
धनतेरस पर किन देवताओं की पूजा करनी चाहिए?
धनतेरस पर भगवान धनवंतरि, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई, स्नान और तत्पश्चात मूर्ति स्थापना कर पूजन करने की परंपरा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 12 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले