2 नवंबर 2026 पंचांग: शुभ योग दोपहर 12:06 तक, अभिजीत मुहूर्त 11:48 से 12:32 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
सोमवार, 2 नवंबर 2026 का पंचांग कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आधारित है, जो दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। हिंदू काल-गणना की इस प्राचीन पद्धति के अनुसार, इस दिन शुभ योग दोपहर 12:06 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा — जो शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। पूजा-पाठ, यात्रा, नया व्यवसाय या निवेश की योजना बनाने वालों के लिए यह पंचांग विशेष रूप से उपयोगी है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रविवार दोपहर 2:51 बजे से आरंभ होकर सोमवार दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। इसके उपरांत नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 3 नवंबर को सुबह 11:54 बजे तक रहेगी। सोमवार को सूर्योदय सुबह 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम 5:44 बजे होगा। चंद्रोदय रात 12:54 बजे और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 1:25 बजे होगा।
नक्षत्र और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में स्थित रहेंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति व्यक्ति में पुराने बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रेरणा देती है।
सूर्य इस दिन तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है, क्योंकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र के अधीन है, जो सूर्य के अग्नि स्वभाव के विपरीत है। इस स्थिति में आत्मबल कुछ कमज़ोर हो सकता है और निर्णय लेने में कठिनाई संभव है। चंद्र देव कर्क राशि में विराजमान रहेंगे, जो उनकी स्वयं की राशि है — इससे कल्पनाशक्ति, कला और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
शुभ काल: शुभ योग, अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
सोमवार को दोपहर 12:06 बजे तक शुभ योग रहेगा। पंचांग की 27 नित्य योगों की गणना में यह 23वाँ योग है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'मंगलकारी, सौभाग्यशाली और पवित्र' है। इसके अधिष्ठाता देवता माता लक्ष्मी और स्वामी ग्रह सूर्य माने जाते हैं। इसके बाद शुक्ल योग आरंभ होगा।
दिन का सर्वाधिक शुभ समय — अभिजीत मुहूर्त — सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा, जो लगभग 44 मिनट का है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव और दोषों का नाश होता है। यह वह बेला है जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर स्थित होते हैं।
अमृतकाल रात 1:34 बजे से 3:07 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्राओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
सोमवार को राहुकाल सुबह 8:00 बजे से 9:23 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को नए या शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। इसकी गणना सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को आठ समान भागों में बाँटकर की जाती है और यह प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है।
यमगंड काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। यह समय यमराज से संबद्ध माना जाता है और इसमें नए कार्य, यात्रा तथा धन-लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल दोपहर 1:33 बजे से 2:57 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। इस काल में नया कार्य आरंभ करना वर्जित माना गया है, हालाँकि बैंक में राशि जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में उचित बताया जाता है।
दिशाशूल और विशेष सावधानियाँ
सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को इंगित करता है जिसमें उस दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। अतः आवश्यक न हो तो सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालना उचित रहेगा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि राहुकाल और यमगंड का समय अभिजीत मुहूर्त के साथ आंशिक रूप से टकराता है — इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य के लिए विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लेना श्रेयस्कर होगा।