1984 सिख विरोधी दंगे: तिलक नगर गुरुद्वारे में भाजपा नेता राजीव बब्बर ने दी श्रद्धांजलि, राहुल गांधी की रैली पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर तिलक नगर स्थित शहीद गुरुद्वारे में विशेष पाठ का आयोजन हुआ, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों के सह-संयोजक राजीव बब्बर ने दंगों में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर बब्बर ने 1984 की घटनाओं को नरसंहार करार देते हुए कांग्रेस नेतृत्व और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा।
नरसंहार बनाम दंगा: बब्बर का तर्क
राजीव बब्बर ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास का सबसे काला अध्याय हैं, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की एकतरफा हत्या की गई। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस ऐतिहासिक बयान का हवाला दिया, जिसमें वाजपेयी ने तिलक नगर के 19 ब्लॉक पहुँचकर कहा था कि यह दंगा नहीं, नरसंहार था।
बब्बर के अनुसार, दंगा दो पक्षों के बीच होता है — किंतु 1984 में एकतरफा कत्लेआम हुआ था। यह ऐसे समय में आया है जब सिख विरोधी दंगों की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस दशकों बाद भी जारी है।
राहुल गांधी की रैली पर सवाल
बब्बर ने कहा कि 1 नवंबर का दिन पीड़ितों की स्मृति और उन्हें श्रद्धांजलि देने का दिन है, इसलिए इस दिन राजनीतिक रैली या आंदोलन आयोजित करना उचित नहीं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस विवादास्पद बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।' बब्बर ने इस बयान को 1984 की हिंसा के संदर्भ में रखते हुए कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी आलोचना की।
मौन रैली: हरि नगर से तिलक नगर तक
बब्बर ने बताया कि पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए हरि नगर से तिलक नगर तक मुँह पर काली पट्टी बाँधकर एक मौन रैली निकाली जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रैली का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देना है।
आम जनता पर असर और भावनात्मक पक्ष
बब्बर ने कहा कि आज का दिन उन परिवारों के लिए बेहद भावुक और दुखद है जिन्होंने 1984 में अपने प्रियजन खोए। उन्होंने सभी से प्रार्थना करने का आग्रह किया कि देश में दोबारा कभी ऐसी हिंसक घटना न हो। गौरतलब है कि हर साल 1 नवंबर को देशभर में सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की याद में कार्यक्रम आयोजित होते हैं और राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक भी होती है।
क्या होगा आगे
मौन रैली के माध्यम से BJP नेता ने यह संदेश दिया कि 1984 की घटनाएँ राजनीतिक विमर्श में जीवित हैं और जवाबदेही की माँग अभी भी प्रासंगिक है। आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में इस मुद्दे पर और अधिक बयानबाज़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।