1 नवंबर 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कबड्डी गोल्ड: जींद की साक्षी शर्मा के गाँव में जश्न, परिवार बोला — 'बेटी ने देश का नाम रोशन किया'

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कबड्डी गोल्ड: जींद की साक्षी शर्मा के गाँव में जश्न, परिवार बोला — 'बेटी ने देश का नाम रोशन किया'

सारांश

ग्लासगो में युगांडा को हराकर गोल्ड जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य जींद की साक्षी शर्मा ने हरियाणा के एक छोटे गाँव का सपना सच कर दिखाया। परिवार और पूरा गाँव एकजुट होकर जश्न में डूबा है — और नज़रें अब ओलंपिक पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

भारतीय महिला कबड्डी टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में युगांडा को हराकर ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीता।
हरियाणा के जींद जिले की खिलाड़ी साक्षी शर्मा इस स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य रहीं।
साक्षी 12 साल से कबड्डी खेल रही हैं — शुरुआत सातवीं कक्षा से हुई थी।
माँ कविता देवी और पूरे गाँव का सपना है कि साक्षी आगे चलकर ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करें।
साक्षी के स्वागत में गाँव में लड्डू बाँटने और घर पर भव्य उत्सव की तैयारी है।

भारतीय महिला कबड्डी टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो में युगांडा को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, और इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बनीं हरियाणा के जींद जिले की खिलाड़ी साक्षी शर्मा। साक्षी की इस उपलब्धि से उनके गाँव और घर में उत्सव का माहौल छा गया है — गाँव की बड़ी स्क्रीन पर पूरे समाज ने एक साथ बैठकर यह मुकाबला देखा।

दादी की खुशी: '12 साल की मेहनत रंग लाई'

साक्षी की दादी मुर्ती देवी ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूँ। मेरी पोती का बचपन से सपना था कि वो कबड्डी खेले। सारे गाँव ने मैच देखा, सभी का कहना था कि लड़की ने पूरे गाँव का नाम रोशन कर दिया।' उन्होंने बताया कि साक्षी 12 साल से कबड्डी खेल रही है — उस समय वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। मुर्ती देवी ने कहा कि पोती के घर लौटने पर वे दूध-दही से भरपूर स्वागत करेंगी।

माँ का सपना: 'ओलंपिक तक पहुँचे मेरी बेटी'

साक्षी की माँ कविता देवी ने भावुक होकर कहा, 'मुझे बड़ी खुशी हुई। गाँव में बड़ी स्क्रीन लगी हुई थी और पूरा गाँव एक साथ बैठकर मुकाबला देख रहा था।' उन्होंने कहा, 'बेटियाँ बेटों से कम नहीं हैं — ऐसी बेटी भगवान सबको दे।' कविता देवी ने बताया कि साक्षी को दूध, घी और चुरमा बेहद पसंद है और उसे चुरमा खिलाकर ही ग्लासगो रवाना किया था। उनकी इच्छा है कि बेटी आगे चलकर ओलंपिक स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करे — और यह सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि पूरे गाँव का सपना है। साक्षी के वापस आने पर लड्डू बाँटे जाएँगे।

पिता का गर्व: 'इससे ज़्यादा क्या चाहिए'

साक्षी के पिता चूड़िया राम ने कहा, 'बेटी ने मेरा नाम, गाँव का नाम, जींद जिले का नाम, हरियाणा राज्य का नाम और फिर देश का नाम रोशन किया। इससे ज़्यादा मुझे क्या चाहिए?' उन्होंने उम्मीद जताई कि साक्षी और मेहनत करे और खेल की ऊँचाइयाँ छुए।

हरियाणा की खेल परंपरा और साक्षी का सफर

गौरतलब है कि हरियाणा भारतीय खेलों में महिला खिलाड़ियों की एक समृद्ध परंपरा रखता है — कुश्ती से लेकर मुक्केबाज़ी और कबड्डी तक। साक्षी शर्मा का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि और परिवार के समर्थन के दम पर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुँचा जा सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कबड्डी स्वर्ण भारत की महिला एथलीटों के बढ़ते दबदबे को और पुख्ता करता है।

आगे क्या

साक्षी शर्मा के घर लौटने पर गाँव में भव्य स्वागत की तैयारियाँ चल रही हैं। परिवार और ग्रामीणों की नज़रें अब ओलंपिक पर टिकी हैं, जिसे वे साक्षी का अगला बड़ा लक्ष्य मानते हैं। यह जीत हरियाणा की खेल-संस्कृति में एक और प्रेरणादायक अध्याय जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पारिवारिक समर्थन और ज़मीनी जुनून से पलता है। मगर सवाल यह भी उठता है कि ऐसी खिलाड़ियों को संस्थागत सहयोग कितना मिलता है — कबड्डी अभी भी ओलंपिक खेल नहीं है, और माँ का ओलंपिक सपना तभी पूरा होगा जब इस खेल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिशें तेज़ हों। गाँव के बड़े पर्दे पर मैच देखने की यह तस्वीर बताती है कि खेल की जड़ें कहाँ हैं — अब ज़रूरत है उन जड़ों तक संसाधन पहुँचाने की।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने किसे हराकर गोल्ड जीता?
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में युगांडा को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत की महिला कबड्डी में कॉमनवेल्थ गेम्स में एक बड़ी उपलब्धि है।
साक्षी शर्मा कौन हैं और वे कहाँ से हैं?
साक्षी शर्मा हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली कबड्डी खिलाड़ी हैं, जो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य रहीं। वे 12 साल से कबड्डी खेल रही हैं और सातवीं कक्षा से इस खेल से जुड़ी हैं।
साक्षी शर्मा के परिवार ने उनकी जीत पर क्या कहा?
साक्षी के पिता चूड़िया राम ने कहा कि बेटी ने गाँव, जींद जिले, हरियाणा और देश का नाम रोशन किया। माँ कविता देवी ने चाहा कि साक्षी ओलंपिक स्तर तक पहुँचे, और दादी मुर्ती देवी ने पोती की वापसी पर दूध-दही से स्वागत का वादा किया।
साक्षी शर्मा के गाँव में जीत का जश्न कैसे मनाया गया?
गाँव में बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी, जिस पर पूरे गाँव ने एक साथ बैठकर फाइनल मुकाबला देखा। साक्षी के घर लौटने पर लड्डू बाँटने और भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है।
क्या साक्षी शर्मा ओलंपिक में भाग ले सकती हैं?
साक्षी की माँ और पूरे गाँव का सपना है कि वे ओलंपिक स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करें। हालाँकि, कबड्डी अभी ओलंपिक खेलों में शामिल नहीं है, इसलिए यह लक्ष्य खेल की अंतरराष्ट्रीय मान्यता पर निर्भर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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