अनु मलिक का जन्मदिन: धुन चोरी के आरोपों पर बोले थे — 'ईश्वर के अलावा कोई मौलिक नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के विवादास्पद और प्रतिभाशाली संगीतकार अनु मलिक — जिनका असली नाम अनवर मलिक है — आज 2 नवंबर 2026 को अपना 66वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। 2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक ने महज सात साल की उम्र में संगीत की प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी और बाद में हिंदी फिल्म संगीत जगत के सबसे चर्चित नामों में से एक बने।
संगीत के माहौल में पली-बढ़ी प्रतिभा
अनु मलिक का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ संगीत की खुशबू हर सुबह बिखरी रहती थी। उनके पिता सरदार मलिक जाने-माने संगीत निर्देशक थे, और उनके मामा हसरत जयपुरी हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार थे। एक पुराने साक्षात्कार में अनु मलिक ने कहा था, 'मैं खुशनसीब हूँ कि सरदार मलिक का बेटा हूँ और मेरे मामा हसरत जयपुरी हैं। मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूँ।' शंकर-जयकिशन के गीतों का उन पर गहरा प्रभाव रहा, जिसने उनकी संगीत-संवेदना को शुरुआत से ही माँजा।
पिता की परीक्षा और पहली पहचान
बचपन में जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता की धुन बनाई और उसे पिता सरदार मलिक को सुनाया, तो वे हैरान रह गए। इसके बाद पिता ने बेटे की परीक्षा ली — उनके सामने कई अलग-अलग गाने रखे और धुन बनाने को कहा। अनु मलिक ने एक के बाद एक धुनें तैयार कर दीं, जिन्हें सुनकर पिता ने उन्हें गले लगा लिया।
16-17 साल की उम्र में ही उन्हें बतौर संगीत निर्देशक काम करने का अवसर मिल गया। वर्ष 1978 में अभिनेता-हास्य कलाकार मोहन चोटी की फिल्म 'हंटरवाली 77' में उन्होंने पिता की जगह संगीत दिया। मामा हसरत जयपुरी के लिखे गीत को जब उन्होंने कंपोज़ किया, तो उसे सुनने वाले दीवाने हो गए।
करियर की बुलंदियाँ
फिल्म 'एक जान हैं हम' से उन्हें सही शुरुआत मिली। इसके बाद 'सोनी महिवाल' आई और फिर अनु मलिक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका सबसे प्रसिद्ध शुरुआती गाना — 'जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा' — जिसे गायिका आशा भोसले ने गाया और बोल हसरत जयपुरी ने लिखे — उनका पहला संगीतबद्ध गाना माना जाता है।
फिल्म 'बाजीगर' के संगीत ने उन्हें नई पहचान दी। इसके बाद 'बॉर्डर' के सभी गाने जबरदस्त हिट रहे। फिल्म 'रिफ्यूजी' के लिए उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।
धुन चोरी के आरोप और विवादास्पद जवाब
शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गीतों की धुनें तथा संगीत-संयोजन चुराने के आरोप भी लगते रहे। 2017 में एक टेलीविज़न शो 'एंटरटेनमेंट की रात' के दौरान 'रोडीज़' के लिए मशहूर रघु राम ने उनसे सीधे इस बारे में सवाल किया।
इसके जवाब में अनु मलिक ने कहा था — 'ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है' — और यह भी कहा कि प्रेरणा लेना और चोरी करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। उन्होंने अपने बचाव में 'बॉर्डर', 'एलओसी कारगिल' और 'मैं हूँ ना' जैसी फिल्मों में किए गए अपने काम का उदाहरण दिया।
विरासत और आगे की राह
अनु मलिक का संगीत सफर विरोधाभासों से भरा रहा है — एक तरफ राष्ट्रीय पुरस्कार और अनगिनत हिट गाने, दूसरी तरफ साहित्यिक चोरी के बार-बार लगने वाले आरोप। आलोचकों का कहना है कि इन विवादों ने उनकी विरासत को एक जटिल रूप दिया है। फिर भी, नब्बे और दो-हजारी दशक के बॉलीवुड संगीत में उनके योगदान को नकारना मुश्किल है। 66वें जन्मदिन पर उनका नाम एक बार फिर उनकी अनूठी जीवन-यात्रा की याद दिला रहा है।