केशव प्रसाद मौर्य का इंडिया गठबंधन पर हमला: 'रामलीला मैदान की रैली लोकतंत्र का भद्दा मज़ाक'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी इंडिया गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह रैली और इसके साथ प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम — दोनों ही लोकतंत्र एवं संविधान का भद्दा मज़ाक हैं।
रैली पर सीधा प्रहार
मौर्य ने कहा कि इंडी गठबंधन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के लिए कई बार प्रयोग किए हैं और हर बार असफलता हाथ लगी है। उनके अनुसार, 2014, 2019 और 2024 के तीन आम चुनावों में देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई है। मौर्य ने आरोप लगाया कि सत्ता से दूर होने की पीड़ा में विपक्ष देश की राजधानी में व्यापार और सामान्य जनजीवन को बाधित करने पर उतारू है।
उन्होंने कहा, 'देश की जनता को यह जनादेश इन लोगों से बर्दाश्त नहीं हो रहा — आप अहंकार में डूबे हुए हैं।' मौर्य के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विपक्ष के विरुद्ध व्यापक पलटवार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
2027 चुनावों की चेतावनी
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2027 से शुरू होने वाले विधानसभा चुनावों में इस रैली का समर्थन करने वाले सभी दलों को जनता के समक्ष जवाब देना होगा। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के हालिया चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह इन राज्यों में BJP को जनसमर्थन मिला, वैसे ही आगामी राज्यों में भी भाजपा सरकार बनेगी।
मौर्य ने यह भी कहा कि 2029 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP चौथी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि 'तख्तापलट के सपने देखने वालों के मुंगेरीलाल के सपने चूर-चूर हो जाएंगे।'
इंदिरा गांधी पुण्यतिथि पर निशाना
मौर्य ने यह भी रेखांकित किया कि शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि थी और विपक्ष ने उसी दिन को अपने महारैली कार्यक्रम के लिए चुना। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व में चुनाव हारने के बाद देश में आपातकाल लगाया गया — जिसे 'संविधान की हत्या' कहा जाता है — उसी दिन को विपक्ष ने अपने आयोजन के लिए उचित समझा। उन्होंने कहा, 'देश बहुत सजग, सावधान और सतर्क है।'
आजम खान और अखिलेश यादव पर पलटवार
समाजवादी पार्टी (SP) के नेता आजम खान के उस बयान पर — कि वे मुस्लिम होने और यूनिवर्सिटी बनाने का खामियाजा भुगत रहे हैं — मौर्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आजम खान को उनके धर्म या यूनिवर्सिटी निर्माण की सजा नहीं मिल रही, बल्कि उनके कथित अपराध और भ्रष्टाचार की सजा मिल रही है।
मौर्य ने माँग की कि चूँकि आजम खान, अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, और उस कार्यकाल में कथित गड़बड़ियाँ हुईं, इसलिए जाँच के दायरे में अखिलेश यादव को भी शामिल किया जाना चाहिए।
BJP का राष्ट्रव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान
मौर्य ने रोहतक में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरे देश में पार्टी द्वारा चलाया जा रहा है, क्योंकि विपक्ष लोकतंत्र की हत्या और देश में अराजकता फैलाने पर उतारू है। मौर्य ने कहा कि विपक्ष ने भारत को बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका समझ लिया है, परंतु यहाँ लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ होता दिख रहा है और विपक्ष अपनी सड़क-राजनीति की रणनीति को विस्तार दे रहा है।