इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च पर BJP का पलटवार: केशव मौर्य बोले — सत्ता वियोग में पागल हुई कांग्रेस
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 8 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन के विरोध मार्च को 'सत्ता वियोग की बौखलाहट' करार दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई वरिष्ठ नेताओं ने एक साथ तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस मार्च को चुनावी हार का बहाना बताया।
केशव मौर्य का सीधा हमला
मौर्य ने कहा, 'कांग्रेस सत्ता के वियोग में पागल हो गई है। वह लगातार कोशिश कर रही है कि राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को लॉन्च कर दे और देश की जनता उन्हें स्वीकार कर ले, लेकिन जनता उन्हें पूरी तरह नकार रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई ठोस शिकायत है, तो उसे सड़क पर उतरने की बजाय चुनाव आयोग के समक्ष रखना चाहिए।
मौर्य ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली स्थिति है। ये लोग चुनाव में जीत नहीं पा रहे और जनता की अदालत में ठहर नहीं पा रहे, इसलिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं।'
ब्रजेश पाठक का संवैधानिक संस्थाओं पर तर्क
डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को कांग्रेस का 'पुराना शगल' बताया। उन्होंने कहा, 'जब ये चुनाव जीतते हैं — तमिलनाडु में, हिमाचल में, केरल में — तब संवैधानिक संस्थाओं पर कुछ नहीं बोलते। बहिष्कार तब क्यों नहीं? यह केवल चुनाव हारने का बहाना ढूंढना है।' पाठक ने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में आएगी।
ओम प्रकाश राजभर का 'वोट चोरी' तर्क पर खंडन
अलीगढ़ में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इंडिया ब्लॉक के वोट चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने तर्क दिया, 'ज्ञानेश कुमार दो साल से मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। अगर वोट चोरी होती, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP 303 सीटें जीतने के बाद 2024 में 240 सीटों पर कैसे सिमट जाती? चोरी करते तो सीटें बढ़तीं, न कि घटतीं।'
राजभर ने ऐतिहासिक उदाहरण भी दिया — उत्तर प्रदेश में 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी की सरकार थी और उसी के नेतृत्व में चुनाव हुआ, फिर भी योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने — यह तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल हमेशा जीत नहीं जाता।
पृष्ठभूमि: इंडिया ब्लॉक का विरोध मार्च क्यों
इंडिया गठबंधन ने SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विरोध मार्च निकाला। गठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हैं।
गौरतलब है कि NDA और इंडिया ब्लॉक के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर यह टकराव पहली बार नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से विपक्षी दलों ने EVM और मतदाता सूची की प्रामाणिकता पर बार-बार सवाल उठाए हैं।
आगे क्या होगा
राजनीतिक टकराव की यह तीव्रता आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले और बढ़ने की संभावना है। BJP नेताओं ने विपक्ष को खुली चुनौती दी है कि वह अपने आरोप चुनाव आयोग के सामने रखे। फिलहाल इंडिया गठबंधन की रणनीति और BJP की जवाबी कार्रवाई दोनों ही उत्तर प्रदेश की राजनीतिक ज़मीन तैयार करने की कोशिश में हैं।