2027 UP चुनाव: केशव प्रसाद मौर्य बोले — विपक्ष साथ लड़े या अलग, भाजपा सरकार तय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 29 सितंबर को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल चाहे एकजुट होकर मैदान में उतरें या अलग-अलग, भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की स्थिति में है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की किसी भी संभावित गठबंधन रणनीति को सिरे से खारिज किया।
विपक्षी एकता पर मौर्य का सीधा प्रहार
मौर्य ने कहा, सपा, बसपा और कांग्रेस भाजपा की विरोधी पार्टियाँ हैं और इन दलों की आपसी बैठकों या निर्णयों से भाजपा को कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का रुख 'राजनीतिक सुविधा' के अनुसार बदलता रहता है — जब उन्हें जीत मिलती है तो चुनावी व्यवस्था सही दिखती है, और जब भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) जीतता है तो उसी व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं।
उन्होंने विपक्ष की इस प्रवृत्ति पर तंज कसते हुए कहा कि 'मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू' वाली राजनीति अब नहीं चलेगी। चुनाव परिणामों की सुविधानुसार व्याख्या करना उचित नहीं है।
ऐतिहासिक जनादेश का हवाला
मौर्य ने अपने दावे को पुष्ट करने के लिए पिछले चुनावी आँकड़े गिनाए। उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 में से 73 सीटें जीती थीं। इसी तरह 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को 325 सीटें मिली थीं, जबकि सपा मात्र 47 सीटों पर सिमट गई थी।
गौरतलब है कि उन्होंने 2004 और 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने तथा 2012 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने का भी उल्लेख किया — यह रेखांकित करने के लिए कि भाजपा ने उन प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरकर बड़े जनादेश हासिल किए।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी
मौर्य ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए प्रस्तावित 16 अक्टूबर के मतदान पर भी बात की। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा की ओर से आठ प्रत्याशी मैदान में उतर सकते हैं। यदि सपा अपना तीसरा प्रत्याशी उतारती है, तो भाजपा भी नौवाँ उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। यह बयान राज्यसभा की सीटों पर सीधे मुकाबले की ओर इशारा करता है।
धार्मिक-सांस्कृतिक एजेंडे पर मौर्य का संकल्प
मौर्य ने अयोध्या में श्रीरामलला के भव्य मंदिर निर्माण को भाजपा की उपलब्धि बताते हुए कहा कि वह 'राम, कृष्ण, विश्वनाथ तीनों देव हमारे साथ' के संकल्प के साथ आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं — जो भाजपा के आगामी सांस्कृतिक-राजनीतिक एजेंडे का संकेत देता है।
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में रणनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। तेलंगाना के संदर्भ में कांग्रेस नेताओं के बयानों पर मौर्य ने कहा कि इससे भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी का संगठन देशभर में जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रहा है।
आने वाले महीनों में राज्यसभा चुनाव के नतीजे और विपक्षी दलों की गठबंधन वार्ता ही तय करेगी कि 2027 की राजनीतिक तस्वीर किस दिशा में आकार लेती है।