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'जगद्धात्री' की सयंतनी घोष बोलीं — माया में दिखती है मेरी झलक, न्याय और बदले में महीन रेखा

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'जगद्धात्री' की सयंतनी घोष बोलीं — माया में दिखती है मेरी झलक, न्याय और बदले में महीन रेखा

सारांश

'जगद्धात्री' की अभिनेत्री सयंतनी घोष ने माया देशमुख के किरदार के ज़रिए न्याय और बदले की महीन रेखा पर गहरी बात की। उन्होंने माना कि लंबे समय तक किरदार निभाने से किरदार और अभिनेता की पहचान आपस में घुलने लगती है — माया में उनकी अपनी झलक है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री सयंतनी घोष धारावाहिक 'जगद्धात्री' में बिजनेस व मीडिया टाइकून 'माया देशमुख' का किरदार निभा रही हैं।
सयंतनी के अनुसार, न्याय और बदला 'एक ही सिक्के के दो पहलू' हैं — लेकिन दोनों के बीच की रेखा अत्यंत महीन है।
उन्होंने कहा कि कानूनी न्याय हो जाने के बावजूद पीड़ित को न्याय न मिलने का अहसास हो सकता है, यहीं स्थिति पेचीदा होती है।
सयंतनी ने माना कि माया के किरदार में उनके खुद के व्यक्तित्व के कई रंग दिखते हैं।
लंबे समय तक किरदार निभाने पर अभिनेता और किरदार के बीच की रेखाएँ धुंधली हो जाती हैं — यह अनुभव उन्होंने साझा किया।

अभिनेत्री सयंतनी घोष इन दिनों लोकप्रिय धारावाहिक 'जगद्धात्री' में 'माया देशमुख' की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच चर्चा में हैं। माया एक शक्तिशाली, निडर और प्रभावशाली बिजनेस व मीडिया टाइकून है। सयंतनी का मानना है कि न्याय और बदले के बीच की रेखा अत्यंत महीन होती है — और यही इस किरदार को इतना जटिल और आकर्षक बनाता है।

न्याय और बदले की महीन रेखा

सयंतनी घोष ने इस विषय पर खुलकर बात करते हुए कहा कि जब लोगों को लगता है कि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी भावनाएँ कभी कभी उन्हें बदले की राह पर ले जाती हैं। उन्होंने कहा, "न्याय और बदला कई मायनों में एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं, लेकिन दोनों के बीच की रेखा बहुत महीन होती है। कानूनी नज़रिए से देखें, तो किसी स्थिति में एक व्यक्ति को सज़ा मिल गई हो और कानूनी तौर पर न्याय हो गया हो, लेकिन फिर भी पीड़ित को लगे कि उसे ठीक से न्याय नहीं मिला — यहीं पर मामला पेचीदा हो जाता है।"

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि न्याय कहाँ खत्म होता है और बदला कहाँ से शुरू होता है। अभिनेत्री ने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से नियमों और अपने दिल दिमाग के बीच संतुलन में विश्वास करती हूँ। हर नियम पर बहस नहीं की जा सकती, लेकिन समाज को चलाने के लिए कुछ ढाँचे और अनुशासन ज़रूरी हैं। साथ ही, कुछ उम्मीदें सामाजिक प्रतिबद्धता से आती हैं और वे हमेशा किसी व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकतीं।"

सामाजिक अपेक्षाओं पर सवाल उठाने की ज़रूरत

सयंतनी ने ज़ोर देकर कहा कि लोगों को कुछ सामाजिक अपेक्षाओं को चुनौती देनी चाहिए और हर नियम को आँख मूँदकर मानने के बजाय यह तय करना चाहिए कि उनके लिए सबसे उचित क्या है। हालाँकि, उन्होंने साफ़ किया कि सिर्फ विद्रोह के लिए विद्रोही होना भी कोई समाधान नहीं है। यह संतुलन की समझ ही माया के किरदार को उनके लिए खास बनाती है।

किरदार और असली ज़िंदगी के बीच धुंधली रेखाएँ

अपने किरदार 'माया देशमुख' और अपनी निजी पहचान के बीच के संबंध पर बात करते हुए सयंतनी ने कहा, "मुझे लगता है कि माया में मेरे खुद के व्यक्तित्व के कुछ पहलू हैं, लेकिन वह मुझे अलग अलग तरीकों से प्रभावित भी करती है। जब आप लंबे समय तक कोई किरदार निभाते हैं, तो कभी कभी असली इंसान और किरदार के बीच की रेखाएँ धुंधली हो जाती हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि माया में सयंतनी के कुछ रंग हैं और कुछ तरीके हैं जिनसे माया सयंतनी को प्रेरित करती है। एक अभिनेता के तौर पर आप हमेशा अपने निभाए किरदारों से कुछ न कुछ अपने साथ ले जाते हैं।" गौरतलब है कि यह वह अनुभव है जो हर दीर्घकालिक धारावाहिक के किरदार में काम करने वाले कलाकार महसूस करते हैं।

अभिनय से मिलने वाले नए दृष्टिकोण

सयंतनी के अनुसार, किरदार अभिनेताओं को कुछ परिस्थितियों को एक अलग नज़रिए से देखने पर मजबूर करते हैं और ऐसे दृष्टिकोण तलाशने का मौका देते हैं, जिनके बारे में शायद उन्होंने कभी सोचा भी न हो। यह रचनात्मक आदान प्रदान ही 'जगद्धात्री' जैसे धारावाहिकों को केवल मनोरंजन से ऊपर उठाकर सामाजिक प्रश्न उठाने का मंच बनाता है।

आने वाले एपिसोड में माया देशमुख का किरदार और नई परतें उजागर करेगा — यह देखना दिलचस्प होगा कि न्याय और बदले की यह कश्मकश पर्दे पर किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वे उस खाई को पाटते हैं जो व्यवस्था और व्यक्तिगत अनुभव के बीच अक्सर बनी रहती है। यह भी उल्लेखनीय है कि हिंदी और बंगाली टेलीविज़न पर ऐसी मज़बूत, नैतिक रूप से जटिल महिला किरदारों की माँग बढ़ रही है — और सयंतनी जैसी अभिनेत्रियाँ इस बदलाव की वाहक बन रही हैं।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सयंतनी घोष 'जगद्धात्री' में कौन सा किरदार निभा रही हैं?
सयंतनी घोष धारावाहिक 'जगद्धात्री' में 'माया देशमुख' का किरदार निभा रही हैं, जो एक शक्तिशाली, निडर और प्रभावशाली बिजनेस व मीडिया टाइकून हैं। यह किरदार न्याय और बदले जैसे जटिल नैतिक प्रश्नों से जूझता है।
सयंतनी घोष ने न्याय और बदले पर क्या कहा?
सयंतनी ने कहा कि न्याय और बदला कई मायनों में एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन दोनों के बीच की रेखा बेहद महीन होती है। उनके अनुसार, कानूनी न्याय मिलने के बाद भी पीड़ित को न्याय न मिलने का अहसास हो सकता है, और यहीं से स्थिति पेचीदा होती है।
क्या सयंतनी घोष माया देशमुख के किरदार से खुद को जोड़ती हैं?
हाँ, सयंतनी ने माना कि माया के किरदार में उनके अपने व्यक्तित्व के कुछ पहलू दिखते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक किरदार निभाने पर अभिनेता और किरदार के बीच की रेखाएँ धुंधली हो जाती हैं।
सयंतनी घोष सामाजिक अपेक्षाओं पर क्या सोचती हैं?
सयंतनी का मानना है कि लोगों को सामाजिक अपेक्षाओं पर सवाल उठाना चाहिए और हर नियम को आँख मूँदकर मानने के बजाय यह तय करना चाहिए कि उनके लिए क्या सही है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बगावत के लिए बगावती होना भी कोई उचित जवाब नहीं है।
अभिनय से सयंतनी घोष को क्या सीखने को मिला?
सयंतनी के अनुसार, किरदार अभिनेताओं को परिस्थितियों को नए दृष्टिकोण से देखने का मौका देते हैं। हर किरदार से अभिनेता कुछ न कुछ अपने साथ ले जाता है, जो उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर समृद्ध करता है।
राष्ट्र प्रेस
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