'सतरंगी: बदले का खेल' में महवश: 'सरनेम से इंसान को जज करना आज भी जारी है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री महवश अपनी आगामी वेब सीरीज 'सतरंगी: बदले का खेल' को लेकर उत्साहित हैं — एक ऐसी सीरीज जो उत्तर भारत की लोक कला 'लौंडा नाच' और जाति-आधारित भेदभाव जैसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखती है। महवश का कहना है कि स्क्रिप्ट सुनते ही उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इस प्रोजेक्ट के लिए हाँ कह दी।
किरदार और कहानी से जुड़ाव
महवश ने बताया कि इस सीरीज से उनका जुड़ाव केवल पेशेवर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी है। उन्होंने कहा, 'जब मैंने कहानी सुनी, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश देने का माध्यम भी है। उत्तर प्रदेश में पली-बढ़ी होने के नाते मैंने अपने आस-पास ऐसी सच्चाइयों को देखा और सुना था। उस दुनिया का हिस्सा बनना मेरे लिए एक बहुत ही सार्थक मौका था।' उन्होंने आगे जोड़ा कि किरदार की भावनात्मक जटिलता ने उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में और अधिक आकर्षित किया — 'मेरे किरदार में भी कई इमोशनल परतें हैं और एक एक्टर के लिए, ऐसी जटिलता हमेशा रोमांचक होती है।'
सरनेम और जाति से जुड़ा सामाजिक संदेश
सीरीज के ट्रेलर से स्पष्ट होता है कि यह कहानी केवल बदले की नहीं, बल्कि पहचान और आत्म-सम्मान की लड़ाई भी है। महवश ने कहा कि आज भी समाज में बड़ी संख्या में लोगों को उनके टाइटल या सरनेम के आधार पर आँका जाता है। उनके शब्दों में, 'जाति आधारित हिंसा आज भी हमारे आसपास देखने को मिलती है। हम सीरीज के माध्यम से बस यह दिखाना चाहते थे कि इंसान का जिन बातों पर बस नहीं होता, उनकी वजह से लोगों को किन मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। यह यकीनन पहचान और इंसाफ की लड़ाई है और मुझे उम्मीद है कि आखिर में समाज यह लड़ाई जीत जाएगा।'
ग्रामीण किरदार और अलीगढ़ की जड़ें
सीरीज में महवश ने एक ऐसी ग्रामीण लड़की का किरदार निभाया है जो एक प्रभावशाली और बाहुबली परिवार से ताल्लुक रखती है और अपने ही परिवार के अत्याचारों तथा जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाती है। उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मुझे यह मुश्किल नहीं लगा, क्योंकि मैंने दोनों तरह की जिंदगी जी है। अगर प्यार पैसा प्रॉफिट ने मेरे मुंबई वाले पहलू को दिखाया, तो सतरंगी मेरे अलीगढ़ के जड़ों को दिखाती है।'
संघर्ष और ऑडिशन की राह
महवश ने अपने सफर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुँचने के लिए अनगिनत ऑडिशन और रिजेक्शन से गुज़रना पड़ा। उनके शब्दों में, 'रिजेक्शन से सीखते हैं और धीरे-धीरे अपनी कला को समझते हैं। डिजिटल कंटेंट के लिए एक्टिंग करना और जज्बाती तौर पर गहरे किरदार निभाना, ये दो अलग-अलग दुनियाएं नहीं हैं। अगर आपको सच में एक्टिंग करनी आती है, तो यह बदलाव अपने आप ही हो जाता है।' जाति और पहचान जैसे मुद्दों को डिजिटल मंच पर उठाने की यह कोशिश दर्शकों के बीच क्या प्रतिक्रिया जगाती है, यह सीरीज की रिलीज के बाद स्पष्ट होगा।