त्रिपुरा की 7,866 आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि पर विचार, CM माणिक साहा का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को अगरतला के हपानिया अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय आशा सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य सरकार प्रदेश में कार्यरत 7,866 आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री साहा ने इस अवसर पर उन्नत प्रशिक्षण के अवसर और अन्य कल्याणकारी पहलों का भी उल्लेख किया।
नौ वर्षों बाद हुआ राज्यस्तरीय सम्मेलन
यह राज्यस्तरीय आशा सम्मेलन लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री साहा ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए आशा कार्यकर्ताओं के योगदान को रेखांकित किया और कहा, 'लोग आपको आशा की किरण के रूप में देखते हैं और आप ठीक यही जिम्मेदारी निभा रही हैं।' उन्होंने इस सम्मेलन को महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त उदाहरण बताया।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका और योगदान
2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के शुभारंभ के बाद से आशा कार्यकर्ताएँ जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता कार्यक्रम पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाती रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन जागरूकता फैलाने से लेकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की रक्षा और टीकाकरण कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन तक, ये कार्यकर्ताएँ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समर्पण के साथ सेवा दे रही हैं।
महिला सशक्तीकरण और सरकारी प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री साहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला सशक्तीकरण को दिए गए विशेष महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी महिलाओं की है। उन्होंने बताया कि 2023 में पारित संवैधानिक संशोधन विधेयक के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार दिया गया है। इसी कड़ी में उन्होंने एक दिन पूर्व त्रिपुरा शिक्षक भर्ती बोर्ड (TRBT) के माध्यम से स्नातकोत्तर शिक्षकों को लगभग 850 नियुक्ति पत्र वितरित करने का भी उल्लेख किया।
आगे की राह
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है और आशा कार्यकर्ताओं के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा के लिए वह प्रतिबद्ध है। मानदेय वृद्धि की घोषणा अभी विचाराधीन है; अंतिम निर्णय और उसके क्रियान्वयन की समय-सीमा की प्रतीक्षा है। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के 'नए भारत' के विजन के अनुरूप 'नए त्रिपुरा' के निर्माण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।