तुषार गांधी का श्रृंखलाबद्ध आंदोलन का ऐलान: ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, EVM-बैलेट दोनों पर सिस्टम को चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए श्रृंखलाबद्ध आंदोलन का ऐलान किया। व्यक्तिगत सत्याग्रह की ऐतिहासिक परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने तिरंगा संविधान पदयात्रा की घोषणा की, जो कॉर्पोरेशन ऑफिस के बाहर फिरोजशाह मेहता की प्रतिमा से शुरू होकर मंत्रालय तक जानी थी। हालाँकि पुलिस ने प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देते हुए पदयात्रा रोकने का प्रयास किया।
आंदोलन का स्वरूप और उद्देश्य
तुषार गांधी ने कहा कि यह एकल घटना नहीं, बल्कि एक लंबी श्रृंखलाबद्ध मुहिम की शुरुआत है। उनके अनुसार, दिल्ली में उसी दिन आयोजित रैली के समर्थन में मुंबई में यह पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा का मार्ग फिरोजशाह मेहता प्रतिमा से रीगल सिनेमा सर्कल, फिर बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा और अंत में मंत्रालय परिसर के निकट पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं महात्मा गांधी की प्रतिमाओं तक निर्धारित था। मार्ग में आने वाली ऐतिहासिक प्रतिमाओं पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने की भी योजना थी।
पुलिस से टकराव और प्रतिबंधित क्षेत्र विवाद
तुषार गांधी के अनुसार, मुंबई पुलिस ने पदयात्रा को आजाद मैदान से आगे जाने देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि यह प्रतिबंधित क्षेत्र है। उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 1 नवंबर छुट्टी का दिन है — कोई दफ्तर, अदालत या सरकारी कार्यालय नहीं चल रहा — इसलिए किसी को भी असुविधा होने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'हम डरते नहीं हैं और आंदोलन करेंगे।' गांधी ने मुंबई पुलिस और राज्य सरकार को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक सत्ता के खिलाफ अपनी कोशिश जारी रख सकता है।
EVM बनाम बैलेट पेपर: सिस्टम पर बड़ा सवाल
तुषार गांधी ने चुनावी प्रक्रिया पर गहरी टिप्पणी करते हुए कहा कि बैलेट पेपर की माँग उठना स्वाभाविक है, लेकिन असली समस्या मतदान पद्धति नहीं, बल्कि उस व्यवस्था में है जो चुनाव से पहले ही नतीजा तय करने की कोशिश करती है। उनके शब्दों में, 'जब तक वह सिस्टम रहेगा, चाहे बैलेट पेपर हो या ईवीएम, वे परिणामों को प्रभावित करने में सफल होते रहेंगे।' आलोचकों का कहना है कि यह बयान चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
पिछले आंदोलनों और महाराष्ट्र चुनाव परिणामों का संदर्भ
तुषार गांधी ने जंतर-मंतर पर हुए पूर्व प्रदर्शनों (जंतर-मंतर-1 और जंतर-मंतर-2) तथा 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान पर हुए आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों में अराजकता फैलाने वाले तत्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थक थे। महाराष्ट्र चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के कई 'दिग्गजों' को उनके गढ़ों में हार का सामना करना पड़ा, जो कथित तौर पर जनमत के बदलते रुख का संकेत है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस में सरकार ने जबरन दुकानें बंद करवाईं और ठेले हटवाए, जिससे छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ।
आगे की रणनीति
तुषार गांधी के अनुसार, यह आंदोलन एक निरंतर प्रक्रिया है, जो तब तक जारी रहेगी जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होता और चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी खेमे में EVM की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि यह गांधी परिवार की विरासत से जुड़े किसी प्रमुख व्यक्ति का इस मुद्दे पर अब तक का सबसे सुनियोजित सार्वजनिक हस्तक्षेप है।