तुषार गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला — मताधिकार छीनना गंभीर अपराध, दोषी पाए जाने पर दंड मिले
सारांश
मुख्य बातें
महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में चुनाव आयोग की नीयत और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए, यह कहते हुए कि जिस तरह नागरिकों से मताधिकार छीना जा रहा है वह एक गंभीर अपराध के समान है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सर्वोच्च न्यायालय विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) और ज्ञानेश कुमार मामले को लेकर चुनाव आयोग पर सख्त रुख अपना चुका है।
मुख्य आरोप और बयान
तुषार गांधी ने कहा, 'पिछले कुछ साल के घटनाक्रम को देखते हुए ये सभी आरोप स्वाभाविक लगते हैं, क्योंकि अगर आप घटनाओं के सिलसिले को देखें, हर किसी को यह महसूस होने लगा है कि चुनावों में कुछ गड़बड़ी हो रही है।' उन्होंने जोड़ा कि वोट डाले जाने के बाद और मतगणना से पहले, हर जगह गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं और कई चुनावों में चौंकाने वाले नतीजे देखने को मिले हैं।
उनके अनुसार चुनाव आयोग सवालों का जवाब देने से बचता रहा है। यही अड़ियल रवैया उन लोगों को आयोग पर आरोप लगाने के लिए मजबूर करता है जिन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एसआईआर और मतदाता सूची विवाद
गांधी ने एसआईआर को लेकर आरोप लगाया कि एक के बाद एक राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े कुछ चुनिंदा लोग फॉर्म-7 भरकर नागरिकों को अपात्र ठहराने की माँग कर रहे हैं। उनके अनुसार इसी प्रक्रिया के ज़रिए हज़ारों मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर मताधिकार हनन बताया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची की सफाई की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और नागरिक समाज ने आपत्ति जताई हो — लेकिन तुषार गांधी का यह बयान सर्वोच्च न्यायालय के सक्रिय हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि में अधिक वज़न रखता है।
सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर रुख
तुषार गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने को पूरी तरह उचित बताया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग और सरकार दोनों को संविधान के अनुरूप काम करने की चेतावनी दी है, जो सराहनीय कदम है।
जवाबदेही और दंड की माँग
तुषार गांधी ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय की जाँच में यह सामने आता है कि काम ठीक से नहीं हुआ, तो चुनाव आयोग को न केवल जवाब देना चाहिए बल्कि दंड भी भुगतना चाहिए। उनका मानना है कि अब समय आ गया है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को नागरिक सहभागिता के ज़रिए संचालित किया जाए।
उन्होंने चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। गांधी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से बाहर कर दिया है और अब पैनल में केवल प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष के एक नेता को रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि यह संरचना कार्यपालिका को चुनाव आयोग की नियुक्ति पर अनुचित प्रभाव देती है।
आगे की दिशा
तुषार गांधी ने नागरिकों के अधिकारों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में परिभाषित करते हुए कहा कि नागरिक का अधिकार सिर्फ वोट देना नहीं, बल्कि अपने मत का सही प्रभाव देखने का हक भी है। सर्वोच्च न्यायालय में एसआईआर और ज्ञानेश कुमार मामले की आगामी सुनवाई यह तय करेगी कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी किस हद तक बढ़ाई जाती है।