मालेगांव में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तिरंगा मार्च, पुलिस ने संगमेश्वर कॉर्नर पर रोका
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मालेगांव में 16 अक्टूबर 2026 को 'संविधान बचाओ समिति' ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तिरंगा मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने संगमेश्वर कॉर्नर पर बैरिकेड लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। मार्च डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा से शुरू होकर महात्मा गांधी की प्रतिमा तक जाना था। प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
मार्च का उद्देश्य और माँगें
महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के युवा अध्यक्ष मुस्तकीम डिग्निटी ने बताया कि यह आयोजन संविधान बचाओ समिति की ओर से किया गया था। उनका कहना था कि मार्च का मूल उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज के प्रति जनता की चिंता को औपचारिक रूप से दर्ज कराना था। समिति की प्रमुख माँग है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें, और यह माँग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी लिखित रूप में भेजी गई है।
डिग्निटी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पुलिस या राज्य सरकार के विरुद्ध नहीं था। उनके अनुसार, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसे पूर्णतः निष्पक्ष रहना चाहिए — न विपक्ष के पक्ष में और न ही सत्ताधारी दल के पक्ष में।
पुलिस की तैनाती और बैरिकेड विवाद
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के निकट आयोजन-स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और नागरिकों को वहाँ पहुँचने से रोका गया। डिग्निटी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का उपयोग किया।
जब मार्च संगमेश्वर कॉर्नर पर रोका गया, तो प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पर चढ़कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और इसके बाद आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त कर दिया।
देशव्यापी तिरंगा मार्च का दावा
मुस्तकीम डिग्निटी ने दावा किया कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह के तिरंगा मार्च आयोजित करने की घोषणाएँ की गई थीं, लेकिन कथित तौर पर कई स्थानों पर इन्हें दबाने की कोशिश हुई। महाराष्ट्र में भी अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही गई।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक समूहों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं, और यह प्रदर्शन उसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
लोकतंत्र और विश्वास का सवाल
डिग्निटी ने कहा कि जब कोई मतदाता अपना मत डालता है, तो उसके पीछे लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा होता है। उनके शब्दों में — 'सही और गलत का फैसला बाद में हो सकता है, लेकिन यदि लोगों का विश्वास नहीं है, तो पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देना चाहिए।'
समिति का कहना है कि वह संविधान की रक्षा और महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आंदोलन जारी रखेगी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और विरोध प्रदर्शनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।