भोपाल में कांग्रेस का 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मार्च; इंडिया गठबंधन सांसदों को रोके जाने पर 'काला दिवस'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ने 8 अक्टूबर 2026 को भोपाल में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' पैदल मार्च निकाला — यह विरोध उस पुलिस कार्रवाई के खिलाफ था जिसमें नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे इंडिया गठबंधन के सांसदों को रोका गया। मध्य प्रदेश की राजधानी में आयोजित इस मार्च में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मार्च का मार्ग और स्वरूप
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार पैदल मार्च व्यापम चौराहे से शुरू हुआ और बोर्ड ऑफिस चौराहे पर स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा तक पहुँचा। मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा का संकल्प लिया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह मार्च उस व्यापक 'काला दिवस' का हिस्सा था जो कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में मनाया।
जीतू पटवारी की तीखी प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलने जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी एवं इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह 'काला दिवस' मनाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने देश की आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान निर्माण और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करने तक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
पटवारी के अनुसार, 'आज जब देश में मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।' उन्होंने सीधे सवाल किया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब निर्वाचन आयोग और सरकार कब देगी।
संघर्ष का दायरा और उद्देश्य
पटवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के वोट के अधिकार, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसा भारत चाहती है जहाँ नफरत की जगह प्रेम, विभाजन की जगह भाईचारा और सत्ता के दबाव की जगह संविधान एवं लोकतंत्र की सर्वोच्चता हो।
गौरतलब है कि यह मार्च ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इंडिया गठबंधन का निर्वाचन आयोग तक पहुँचने का प्रयास और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई इस विवाद की ताज़ा कड़ी है।
आगे क्या होगा
पटवारी ने ऐलान किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से जनता की आवाज़ उठाती रहेगी। विपक्ष के इस बढ़ते दबाव के बीच निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होगी।