इंडी ब्लॉक के 'मॉक महाभियोग' पर भाजपा का पलटवार: प्रह्लाद जोशी बोले, 'सब कुछ डुप्लीकेट'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026 — इंडिया ब्लॉक द्वारा रामलीला मैदान में 'वोट चोरी' के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित प्रदर्शन पर केंद्र सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए उनके 'मॉक महाभियोग' को 'ड्रामा' और 'डुप्लीकेट कवायद' करार दिया।
प्रह्लाद जोशी का तंज: '30 साल तक मॉक पार्लियामेंट का मौका देंगे'
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'मॉक महाभियोग' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'पहली बात यह है कि यह गठबंधन इंडिया ब्लॉक नहीं, यह इंडी ब्लॉक है। इंडी ब्लॉक का प्रधानमंत्री मॉक होगा, इनके स्पीकर और मंत्री मॉक होंगे, क्योंकि यह सब डुप्लीकेट ही है। हम इनको 30 साल तक मॉक पार्लियामेंट करने का मौका देंगे।' जोशी ने इशारा किया कि विपक्षी गठबंधन की इस कार्रवाई का देश की जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तुहिन सिन्हा का हमला: 'जनता के खिलाफ युद्ध का ऐलान'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने इंडी अलायंस के इस प्रदर्शन को देश की जनता के विरुद्ध 'युद्ध' करार दिया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर जिस प्रकार से इंडी ब्लॉक ने कार्यक्रम आयोजित किया है, उससे प्रतीत होता है कि ये लोग मॉक पार्लियामेंट के लायक हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने पहले ही इस विषय पर विशेष सत्र बुलाने की पेशकश की थी, इसलिए 'महाभियोग ड्रामे' की कोई ज़रूरत नहीं थी।
सिन्हा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शन के कारण रामलीला मैदान के आसपास कारोबारियों को पहले ही ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है और यदि यह रैली जारी रही तो कुल नुकसान ₹10,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। उन्होंने बताया कि व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस से गुहार लगाई थी कि रैली को एक हफ्ते के लिए स्थगित किया जाए।
वोट चोरी का इतिहास: भाजपा की 'तीन बार' वाली दलील
तुहिन सिन्हा ने इंडी ब्लॉक के 'वोट चोरी' के आरोपों को पलटते हुए ऐतिहासिक उदाहरण दिए। उनके अनुसार, 29 अप्रैल 1946 को कांग्रेस पार्टी की बैठक में 15 नेताओं ने मतदान किया, जिसमें 12 वोट सरदार पटेल के पक्ष में और केवल 3 वोट जवाहर लाल नेहरू के पक्ष में पड़े, लेकिन नेहरू को पहला प्रधानमंत्री घोषित किया गया। उन्होंने 1975 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें इंदिरा गांधी के 1971 के चुनाव को बड़े पैमाने पर 'इलेक्टोरल बैड प्रैक्टिसेज' के कारण खारिज किया गया था। तीसरा मामला उन्होंने 1987 का बताया। गौरतलब है कि भाजपा ने ये दावे विपक्षी आरोपों के जवाब में रखे हैं; इन ऐतिहासिक व्याख्याओं पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं।
मध्य प्रदेश: उपमुख्यमंत्री देवड़ा की टिप्पणी
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह में भाग लेने के लिए जबलपुर पहुँचे उपमुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की जनता पूरी तरह समझती है कि राहुल गांधी क्या कर रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की संभावनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहा है। भाजपा का यह पलटवार स्पष्ट संकेत है कि वह विपक्षी 'मॉक महाभियोग' को संसदीय लोकतंत्र के लिए अपमानजनक बताकर जनमत बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और तीव्र होने की संभावना है।